
राजधानी रायपुर में पुलिस ने एक लापता नाबालिग को महज दो घंटे के भीतर सकुशल ढूंढ निकाला है. यह कामयाबी रायपुर और बिलासपुर पुलिस के शानदार अंतर्राज्यीय समन्वय और त्वरित कार्रवाई का नतीजा है.
दरअसल, आज सुबह करीब 11:15 बजे, खेमचंद जैन नामक व्यक्ति ने सिलतरा थाना धरसीवा में अपने 15 वर्षीय बेटे के लापता होने की सूचना दी. उन्होंने बताया कि उनका बेटा कल रात लगभग 8:30 बजे अपनी इलेक्ट्रिक एक्टिवा (सीजी/04/पी के /2346) लेकर बिना बताए घर से चला गया था और रिश्तेदारों के पास भी उसका कोई पता नहीं चला.
सूचना मिलते ही, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक/उपमहानिरीक्षक डॉ. लाल उमेन्द सिंह, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शहर श्री लखन पटले और नगर पुलिस अधीक्षक उरला सुश्री पूर्णिमा लामा को तत्काल सूचित किया गया. उनके निर्देश पर, गुमशुदा बच्चे की तलाश के लिए तुरंत एक टीम गठित की गई.
GPS बना मददगार:
जांच के दौरान, परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार, लापता एक्टिवा में जीपीएस सिस्टम लगा था, हालांकि वह निष्क्रिय था. पुलिस टीम ने लोधी पारा स्थित होंडा शोरूम से तुरंत संपर्क किया, जहां से वाहन खरीदा गया था. पुलिस ने परिजनो के साथ मिलकर शोरूम स्टाफ की मदद से क्रेता के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर जीपीएस एक्टिवेट करवाया.
जीपीएस ट्रेस करते ही, एक्टिवा का पहला लोकेशन कोनी रोड, बिलासपुर में मिला. रायपुर पुलिस ने तुरंत बिलासपुर ए.सी.सी.यू. (क्राइम ब्रांच) के निरीक्षक श्री मोहम्मद अजहर से संपर्क कर लोकेशन और वाहन नंबर साझा किया और तत्काल पतासाजी का अनुरोध किया. बिलासपुर ए.सी.सी.यू. टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की, लेकिन बच्चा और वाहन वहां नहीं मिले.
दूसरा लोकेशन और सफल बरामदगी:
दूसरी बार जीपीएस ट्रेस करने पर, एक्टिवा का लोकेशन आर.बी. पेट्रोल पंप गतौरी, बिलासपुर में पाया गया. बिलासपुर ए.सी.सी.यू. टीम बिना समय गंवाए तत्काल गतौरी पेट्रोल पंप के लिए रवाना हुई. वहां पहुंचने पर, लापता बालक अपनी एक्टिवा को चार्ज करते हुए सकुशल मिल गया. टीम ने उसे सुरक्षित बरामद कर परिजनो को सौंप दिया.
पुलिस समन्वय का बेहतरीन उदाहरण:
रायपुर और बिलासपुर पुलिस की इस संयुक्त और त्वरित कार्रवाई ने सूचना मिलने के सिर्फ दो घंटे के भीतर एक अनहोनी को टाल दिया. इस सफल ऑपरेशन में पुलिस सहायता केंद्र सिलतरा प्रभारी उनि राजेंद्र सिंह कंवर, प्रधान आरक्षक 1347 कामता सिंह, आरक्षक क्रमांक 1247 सदानंद ठाकुर, आरक्षक क्रमांक 1409 राजकुमार चौबे, और बिलासपुर ए.सी.सी.यू. (क्राइम ब्रांच) के निरीक्षक श्री मोहम्मद अजहर, आरक्षक क्रमांक 1216 महादेव कुजुर, आरक्षक क्रमांक 1404 तदवीर सिंह पोर्ते का उल्लेखनीय योगदान रहा. यह घटना पुलिस समन्वय और तत्परता का एक बेहतरीन उदाहरण पेश करती है.



