वसुंधरा परियोजना से राजस्व अभिलेखों का होगा डिजिटलीकरण:छत्तीसगढ़

क्या आप भी जमीन की पुरानी नकल, खसरा या नामांतरण के कागजातों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट-काटकर परेशान हो चुके हैं? अगर हां, तो छत्तीसगढ़ सरकार आपके लिए एक बड़ी राहत लेकर आई है। राज्य में अब राजस्व प्रक्रियाओं को पारदर्शी, सुरक्षित और आसान बनाने के लिए ‘वसुंधरा परियोजना’ की शुरुआत की गई है।
इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत छत्तीसगढ़ के सभी जिला और तहसील स्तर के राजस्व रिकॉर्ड रूम का कायाकल्प (आधुनिकीकरण) किया जाएगा और सालों पुराने भू-अभिलेखों का पूरी तरह से डिजिटलीकरण (Scanning & Data Entry) होगा।
चरणबद्ध तरीके से होगा क्रियान्वयन
मंत्रालय (महानदी भवन) में आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्य सचिव श्री विकासशील ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि नामांतरण और अन्य राजस्व प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और एकरूपता लाई जाए।
- पहला चरण: योजना को सबसे पहले प्रदेश के कुछ चुने हुए जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू किया जाएगा।
- विस्तार: सफलता मिलते ही इसे छत्तीसगढ़ के सभी 33 जिलों में पूर्ण रूप से लागू कर दिया जाएगा।
कौन-कौन से दस्तावेज होंगे डिजिटल?
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी के अनुसार, इस परियोजना में आपके जमीनों से जुड़े लगभग सभी छोटे-बड़े और पुराने से पुराने दस्तावेजों को डिजिटल रूप में सुरक्षित किया जाएगा:
- खसरा, किश्तबंदी खतौनी और मूल ग्राम नक्शे
- बंदोबस्त एवं चकबंदी मिसल, निस्तार पत्रक
- अधिकार अभिलेख पंजी और संशोधन पंजी
- वर्ष 2020 से पूर्व के खसरा पंचशाला अभिलेख
- राजस्व न्यायालयों द्वारा जारी किए गए विभिन्न आदेश
सेवा सेतु पोर्टल से जुड़ेंगी आपकी सुविधाएं
डिजिटलीकरण के बाद यह पूरा डेटाबेस ‘सेवा सेतु’ पोर्टल से इंटीग्रेट (एककीकृत) कर दिया जाएगा। इससे आम नागरिकों को घर बैठे ये सुविधाएं मिलेंगी:
- प्रमाणित डिजिटल प्रति (Certified Copies) प्राप्त करना
- ऑनलाइन आवेदन और ऑनलाइन शुल्क भुगतान
- अपने आवेदन की लाइव स्थिति (Track Status) देखना
AI और OCR तकनीक से सेकंडों में खोजें पुराने से पुराना रिकॉर्ड
अक्सर कई दशक पुराने या हस्तलिखित (हाथ से लिखे) दस्तावेजों को ढूंढना बेहद मुश्किल होता है। इस समस्या से निपटने के लिए सरकार आधुनिक तकनीक का सहारा ले रही है:
- बारकोड और डिजिटल लोकेशन: रिकॉर्ड रूम में रखी हर फाइल पर बारकोड होगा, जिससे उसकी सही जगह तुरंत पता चल सकेगी।
- AI और OCR (ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकॉग्निशन): हाथ से लिखे पुराने कागजातों को भी एआई-आधारित सर्च से सेकंडों में खोजा जा सकेगा।



