सोशल मीडिया पर छत्तीसगढ़ के राज्यपाल का कार्टून शेयर करना पश्चिम बंगाल के दो युवकों को पड़ा भारी: हाईकोर्ट से बिना शर्त माफी के बाद रद्द हुई FIR

सोशल मीडिया पर कोई भी पोस्ट बिना सोचे-समझे शेयर करना कितना भारी पड़ सकता है, इसका ताजा उदाहरण छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में देखने को मिला। राज्य के राज्यपाल से जुड़े एक विवादित कार्टून को फेसबुक पर री-शेयर करने वाले दो युवकों के खिलाफ दर्ज FIR और आपराधिक कार्यवाही को हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया है। हालांकि, इसके लिए दोनों आरोपियों को अदालत के सामने बिना शर्त माफी मांगनी पड़ी।
क्या था पूरा मामला?
यह विवाद फेसबुक पर शेयर की गई एक कार्टून-शैली की पोस्ट से जुड़ा हुआ था, जिसमें असमिया भाषा के कैप्शन के साथ छत्तीसगढ़ के राज्यपाल पर आपत्तिजनक टिप्पणी की गई थी। आरोपी प्रणब कलिता और लक्ष्यधर राजबंशी ने इस विवादित सामग्री को अपने-अपने फेसबुक अकाउंट से री-शेयर कर दिया था। मामला सामने आने के बाद पुलिस ने दोनों के खिलाफ सख्त कार्यवाही करते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS) और IT Act की गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज कर कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी थी।
किन धाराओं में फंसा था पेंच?
पुलिस ने आरोपियों पर सार्वजनिक शांति भंग करने और डिजिटल माध्यम से आपत्तिजनक सामग्री फैलाने का आरोप लगाते हुए ये धाराएं लगाई थीं:
- BNS धारा 352: जानबूझकर अपमान कर शांति भंग करने का प्रयास।
- BNS धारा 353(1) व 353(2): सार्वजनिक उपद्रव, भ्रम और विभिन्न वर्गों के बीच नफरत भड़काने वाले बयान प्रसारित करना।
- IT Act धारा 66: कंप्यूटर या मोबाइल के जरिए डिजिटल अपराध को अंजाम देना।
हाईकोर्ट में कैसे बना समझौता?
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। अदालत ने पाया कि आरोपियों ने केवल पोस्ट को शेयर किया था और उनसे किसी तरह की शारीरिक हिंसा या उपद्रव भड़कने की घटना नहीं हुई थी।
मामले को खत्म करने के लिए आरोपियों को सख्त शर्तों का पालन करना पड़ा:
- लिखित माफीनामा: दोनों आरोपियों ने हाईकोर्ट में हलफनामा पेश कर बिना शर्त लिखित माफी मांगी।
- सार्वजनिक माफी: आरोपियों को अपने फेसबुक पेज पर सार्वजनिक रूप से माफीनामा पोस्ट करना पड़ा।
- अखबारों में विज्ञापन: असम के प्रमुख समाचार पत्रों में भी माफी का विज्ञापन प्रकाशित कराया गया।
- सामग्री हटाना व केस वापसी: विवादित पोस्ट को सोशल मीडिया से स्थायी रूप से हटाया गया और इससे जुड़ा काउंटर-केस वापस लिया गया।
अदालत का संदेश
राज्य सरकार और शिकायतकर्ता की सहमति के बाद हाईकोर्ट ने माना कि जब आरोपियों ने अपनी गलती स्वीकार कर बिना शर्त माफी मांग ली है और सभी शर्तें पूरी कर दी हैं, तो इस केस को आगे खींचने का कोई औचित्य नहीं बनता। इसके बाद कोर्ट ने दर्ज FIR और पूरी चार्जशीट को पूरी तरह निरस्त कर दिया।
डिजिटल पाठकों के लिए सबक: सोशल मीडिया पर कोई भी फोटो, कार्टून या पोस्ट बिना पुष्टि किए शेयर न करें। केवल शेयर करना भी आपको वर्तमान दौर मे कानूनी पचड़े में डाल सकता है।



