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ऑटो-डिलीट हो चुके CCTV फुटेज को पेश करने का आदेश नहीं दे सकती अदालत: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का फैसला

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने एक अहम कानूनी व्यवस्था देते हुए स्पष्ट किया है कि यदि पुलिस थाने की CCTV फुटेज निर्धारित समय बीत जाने के बाद सिस्टम से अपने आप (Automatically) डिलीट हो चुकी है, तो अदालत उसे पेश करने का निर्देश नहीं दे सकती।

मामला क्या था?

यह पूरा मामला जिला गौरेला-पेंड्रा-मरवाही के थाना गौरेला में दर्ज अपराध क्रमांक 304/2024 से जुड़ा है। इसमें चार आरोपियों—बनवारी लाल गुप्ता, रोहित गुप्ता, अंकुल जैतवार और गोपाल पनाडिया उर्फ गोपी पनिका—को गांजा परिवहन के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने उनके खिलाफ NDPS एक्ट की धारा 20(b), 29 और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 111 के तहत मामला दर्ज कर चार्जशीट दाखिल की थी।

आरोपियों की मांग और पुलिस का जवाब

मामले में खुद को बेकसूर बताते हुए आरोपियों ने बिलासपुर के विशेष न्यायाधीश (NDPS एक्ट) की अदालत में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 94 के तहत एक आवेदन लगाया।

  • आरोपियों का दावा: उन्हें घटना से एक दिन पहले ही थाने में बैठा लिया गया था और गलत तरीके से फंसाया गया है। अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए उन्होंने 13 से 15 सितंबर 2024 के दौरान थाना गौरेला की 36 घंटे की अनएडिटेड CCTV फुटेज और मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) मंगवाने की मांग की।
  • पुलिस ( गौरेला) का पक्ष: थानेदार ने रिपोर्ट प्रस्तुत कर बताया कि फुटेज सुरक्षित रखने का कोई पूर्व अदालती आदेश नहीं था। तय स्टोरेज प्रोटोकॉल के तहत 18 महीने की अवधि पूरी होने के बाद CCTV रिकॉर्डिंग स्वतः ही डिलीट हो चुकी है। जहां तक CDR का सवाल है, उसे पहले ही चार्जशीट के साथ कोर्ट में जमा किया जा चुका है।
  • निचली अदालत ने CCTV फुटेज देने की मांग खारिज कर दी, जिसके बाद आरोपियों ने हाईकोर्ट में याचिका (WPCR No. 306 of 2026) दायर की।

हाईकोर्ट की अहम टिप्पणियां और फैसला

मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने निचली अदालत के फैसले को बिल्कुल सही ठहराते हुए याचिका खारिज कर दी:

  • उपलब्धता पर निर्भर करता है अधिकार: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि BNSS की धारा 94 के तहत किसी दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य को पेश कराने का अधिकार व्यापक है, लेकिन इसका प्रयोग सामग्री की वास्तविक उपलब्धता पर निर्भर करता है। जो रिकॉर्ड डिलीट हो चुका है, उसे पेश करने का आदेश नहीं दिया जा सकता।
  • समानांतर जांच की अनुमति नहीं: कोर्ट ने कहा कि रिट याचिका का इस्तेमाल मुकदमे के दौरान समानांतर जांच शुरू करने के लिए नहीं किया जा सकता।
  • राज्य सरकार को सख्त निर्देश: सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों का हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन को सख्त निर्देश दिए कि प्रदेश के सभी 550 पुलिस थानों में CCTV कैमरे हर समय चालू रहें, पर्याप्त पावर बैकअप और स्टोरेज क्षमता सुनिश्चित की जाए, ताकि प्रशासनिक या तकनीकी लापरवाही से साक्ष्य नष्ट न हों।
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