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सेवानिवृत्त जेल अधीक्षक पर रिटायरमेंट के 8 साल बाद कार्यवाही पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, रिकवरी ऑर्डर रद्द

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारियों के हक में एक बेहद अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि राज्य सरकार सेवानिवृत्ति के बाद बहुत पुराने मामलों को उठाकर मनमाने ढंग से अनुशासनात्मक कार्यवाही या पैसों की रिकवरी नहीं कर सकती। न्यायमूर्ति अग्रवाल की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार द्वारा 18 अक्टूबर 2019 को जारी उस आदेश को खारिज कर दिया, जिसके तहत याचिकाकर्ता डॉ. श्याम राज सिंह से 1,09,975 रुपये की वसूली करने का निर्देश दिया गया था।

क्या है पूरा मामला? :-  डॉ. श्याम राज सिंह पर आरोप वर्ष 2004-05 और 2005-06 के मामलों से जुड़े थे। हालांकि, राज्य शासन ने उन्हें इसके लिए 29 मई 2013 को चार्जशीट जारी की—यानी घटना के लगभग 7 से 8 साल बाद। पेंशन नियमों के अनुसार इतने लंबे समय बाद विभागीय कार्रवाई शुरू करना कानूनन प्रतिबंधित (Time-barred) है। इसके बावजूद शासन ने कार्रवाई जारी रखते हुए रिकवरी का आदेश दे दिया था, जिसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी।

कोर्ट की मुख्य और सख्त टिप्पणियां:

  • नियमों में ढील देने का मतलब कानून बदलना नहीं: राज्य सरकार ने देरी को नजरअंदाज करने के लिए नियम 79 (Rule 79) का हवाला दिया था। इस पर कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि नियम 79 किसी विशेष परिस्थिति में कर्मचारी को राहत देने के लिए बना है, न कि नियमों को नए सिरे से लिखने या पुराने खत्म हो चुके मामलों को दोबारा जिंदा करने के लिए।
  • प्रशासनिक मनमानी पर रोक: अदालत ने सचेत किया कि यदि प्रशासनिक छूट के नाम पर तय कानूनी समय-सीमा को दरकिनार करने की छूट दी गई, तो यह प्रावधान सेवानिवृत्त अधिकारियों के खिलाफ उत्पीड़न का जरिया बन जाएगा।
  • केवल वित्त विभाग की सहमति काफी नहीं: फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने साफ किया कि केवल वित्त विभाग की औपचारिक सहमति ले लेना ही पर्याप्त नहीं है। जहां नियम में लिखित कारण दर्ज करना जरूरी हो, वहां सक्षम प्राधिकारी को स्पष्ट कारण बताने ही होंगे।

रिटायर्ड कर्मचारियों के लिए बड़ा सुरक्षा कवच :- सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों (स्टेट ऑफ यूपी बनाम श्री कृष्ण पांडे) का हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि सेवानिवृत्ति के बाद की कार्रवाई के लिए तय समय-सीमा एक कानूनी सुरक्षा कवच है। कोई भी प्रशासनिक संस्था कानून से ऊपर जाकर पुराने गड़े मुर्दे उखाड़कर कार्रवाई नहीं कर सकती। इस फैसले से प्रदेश के हजारों रिटायर्ड कर्मचारियों को बड़ी राहत मिली है।

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