जागरूकताप्रशासनसामाजिकसुकमा

बाल विवाह कानूनन अपराध: सुकमा में सजने से पहले ही रुका 16 वर्षीय नाबालिग का विवाह, दोनों पक्षों को दी गई चेतावनी

छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले से बाल विवाह रोकथाम और बाल अधिकारों की सुरक्षा से जुड़ी एक खबर सामने आई है। सुकमा जिले के तोंगपाल क्षेत्र में प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 16 वर्षीय नाबालिग बालिका का विवाह रुकवाकर उसे सुरक्षित संरक्षण प्रदान किया है।

तत्परता से पहुंची संयुक्त टीम

सुकमा जिले के मासापारा कावराकोपा क्षेत्र में बाल विवाह की गुप्त सूचना मिलते ही महिला एवं बाल विकास विभाग, जिला बाल संरक्षण इकाई, चाइल्ड लाइन और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम तुरंत मौके पर पहुंची। प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर दोनों पक्षों को बाल विवाह से होने वाले शारीरिक, मानसिक व सामाजिक नुकसानों से अवगत कराया। इसके साथ ही ‘बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006’ के कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी गई, जिसके बाद युवक पक्ष ने विवाह स्थगित करने पर सहमति जताई।

बालिका की सुरक्षा को दी गई प्राथमिकता

प्राप्त जानकारी के अनुसार, महारापारा हमीरगढ़ (सुकमा) निवासी 16 वर्षीय बालिका को विवाह के उद्देश्य से युवक अपने साथ लेकर आया था। प्रशासनिक टीम ने बालिका के सर्वोत्तम हित और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उसे उसके गृहग्राम पहुंचाया। हालांकि, घर पर परिजनों के न मिलने के कारण बालिका को सुरक्षित रूप से सुकमा लाया गया। बाल कल्याण समिति के समक्ष आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने तक बालिका को ‘सखी वन स्टॉप सेंटर’ में सुरक्षित आश्रय दिया गया है।

कार्यवाही के दौरान दोनों पक्षों से घोषणा-पत्र लिया गया और पंचनामा तैयार किया गया। साथ ही परिजनों को स्पष्ट चेतावनी दी गई कि कानून का उल्लंघन करने पर कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

टीम की समन्वित कार्यवाही

जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी और जिला बाल संरक्षण अधिकारी के मार्गदर्शन में संपन्न हुई इस कार्रवाई में संरक्षण अधिकारी, सेक्टर सुपरवाइजर, चाइल्ड लाइन परियोजना समन्वयक, स्थानीय पुलिस, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, ग्राम सचिव और रोजगार सहायक शामिल रहे।

बाल विवाह से जुड़े कानूनी प्रावधान और सामाजिक दुष्प्रभाव

  • कानूनी अपराध: बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के तहत 18 वर्ष से कम उम्र की लड़की और 21 वर्ष से कम उम्र के लड़के का विवाह कराना कानूनन दंडनीय अपराध है। इसमें शामिल होने वाले या सहयोग करने वाले व्यक्तियों को 2 साल तक की जेल और 1 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।
  • स्वास्थ्य पर असर: कम उम्र में विवाह से बालिकाओं के शारीरिक व मानसिक विकास पर बुरा असर पड़ता है और कम उम्र में गर्भावस्था उनके जीवन के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न कर सकती है।
  • शिक्षा से वंचना: बाल विवाह के कारण बालिकाएं शिक्षा के मौलिक अधिकार और आत्मनिर्भर बनने के अवसरों से वंचित रह जाती हैं।

यदि आपको अपने आसपास बाल विवाह की जानकारी मिलती है, तो तुरंत चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 या नजदीकी पुलिस थाने व महिला एवं बाल विकास विभाग को सूचित करें।

Join Dainik Bodh Whatsapp Community

Related Articles

Back to top button