दुर्गन्यायालय

अदालत नहीं, चौपाल में समाधान: दुर्ग में बैलगाड़ी पर निकली ‘न्याय की गाड़ी’, 5 दिन में 5 गांवों तक पहुँचा कानून!

क्या हर छोटे-मोटे विवाद और झगड़े के लिए अदालत के चक्कर काटना जरूरी है? बिल्कुल नहीं! इसी सोच के साथ जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA), दुर्ग ने एक अनोखी और सराहनीय पहल की है।

प्राधिकरण ने “पांच गांव, पांच दिन, एक संकल्प — विवाद नहीं, संवाद से समाधान” नाम से 5 दिवसीय विशेष कानूनी जागरूकता अभियान चलाया। इस अभियान का सबसे अनूठा नजारा तब देखने को मिला जब आधुनिक गाड़ियों और स्क्रीन्स को छोड़कर छत्तीसगढ़ के लोक पर्व ‘हरेली’ पर कानून की टीम पारंपरिक बैलगाड़ी पर सवार होकर ग्रामीणों के बीच पहुंची।

हरेली पर सजी ‘जस्टिस ऑन व्हील्स’ (न्याय की बैलगाड़ी)

ग्राम निकुम में हरेली त्योहार के शुभ अवसर पर DLSA दुर्ग की टीम ने एक पारंपरिक बैलगाड़ी को बहुत ही खूबसूरती से सजाया और उसे ‘जस्टिस ऑन व्हील्स’ (पहियों पर न्याय) का नाम दिया।बैलगाड़ी पर सवार होकर कानून के जानकारों ने गांव की गलियों का भ्रमण किया और चौपालों पर बैठकर ग्रामीणों से सीधा संवाद किया। इस मौके पर पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए पौधारोपण अभियान भी चलाया गया।

5 दिन, 5 गांव और अलग-अलग संदेश

यह अभियान 5 दिनों के भीतर जिले के 5 प्रमुख गांवों तक पहुँचा: घुघसीडीह ➔ ननकाट्ठी ➔ अरसनारा ➔ निकुम ➔ कुठरेल

  1. ग्राम निकुम (बैलगाड़ी से न्याय): घर-घर तक संवाद के जरिए प्री-लिटिगेशन मध्यस्थता (कोर्ट जाने से पहले आपसी सुलह) का संदेश पहुँचाया गया।
  2. ग्राम ननकाट्ठी (विश्व आदिवासी दिवस और साइबर सुरक्षा): यहाँ बालकों के शासकीय हॉस्टल में छात्रों को कानूनी अधिकारों की जानकारी दी गई और साइबर फ्रॉड से बचने के 3 सुनहरे नियम बताए गए:
    • किसी के साथ OTP शेयर न करें।
    • किसी भी अज्ञात या संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें।
    • अपनी बैंकिंग और व्यक्तिगत जानकारी पूरी तरह गोपनीय रखें।
  3. ग्राम कुठरेल (लोक संस्कृति से सामाजिक सुधार): छत्तीसगढ़ी लोक गीतों के माध्यम से टोनही प्रथा (अंधविश्वास) उन्मूलन, नशामुक्ति, और बच्चों की सुरक्षा (गुड टच / बैड टच) जैसे संवेदनशील मुद्दों पर जागरूक किया गया।
  4. ग्राम अरसनारा और घुघसीडीह (आपसी सौहार्द): पारिवारिक, जमीन-जायदाद और पड़ोस के विवादों को कोर्ट जाने से पहले आपस में बैठकर सुलझाने पर जोर दिया गया, ताकि पैसे और समय दोनों की बचत हो सके।

इस पहल के पीछे की प्रमुख हस्तियां

यह पूरा अभियान श्री के. विनोद कुजूर (प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश व अध्यक्ष, DLSA दुर्ग) के मार्गदर्शन में संचालित किया गया।

अभियान की नेतृत्व टीम में शामिल थे:

  • श्रीमती सुषमा लकड़ा (अध्यक्ष, स्थायी लोक अदालत)
  • श्री भूपेश कुमार बसंत (मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट / CJM)
  • श्री उमेश कुमार भगवतकर (सचिव, DLSA दुर्ग)

इसके अलावा, कल्याण लॉ कॉलेज (दुर्ग) के कानून के छात्रों, प्रोफेसरों, पैरा-लीगल वॉलंटियर्स (PLVs) और प्रशिक्षित सामुदायिक मध्यस्थों ने नुक्कड़ नाटकों और रैलियों के जरिए ग्रामीणों को उनकी ही बोली-भाषा में कानून की बातें समझाईं।

“न्याय पाने के लिए हमेशा अदालत का दरवाजा खटखटाना जरूरी नहीं है; सही बातचीत और संवाद के जरिए न्याय खुद आपके दरवाजे तक पहुँच सकता है।”

Join Dainik Bodh Whatsapp Community

Related Articles

Back to top button