
पूर्व बिलासपुर संभाग कार्यकारी अध्यक्ष कमल सोनी के पद से इस्तीफे और उनके द्वारा उठाए गए गंभीर सवालों के बाद चेम्बर के शीर्ष नेतृत्व, विशेषकर अध्यक्ष सतीश थौरानी के रवैये पर सवाल उठने लगे हैं। कमल सोनी द्वारा प्रस्तुत किए गए तथ्यों ने अध्यक्ष थौरानी के तर्कों की हवा निकाल दी है।
‘ड्राफ्ट ही नहीं बना’— थौरानी का बचकाना दावा ध्वस्त:- हाल ही में अध्यक्ष सतीश थौरानी ने बयान दिया था कि संविधान संशोधन का ड्राफ्ट तैयार ही नहीं हुआ है। इस पर पलटावार करते हुए कमल सोनी ने साफ कर दिया कि ड्राफ्ट न केवल पूरी तरह तैयार है, बल्कि इसकी आधिकारिक जानकारी 6 अगस्त के पत्र में ही दे दी गई थी। अब सवाल यह उठता है कि क्या अध्यक्ष महोदय अपने ही संगठन के दस्तावेजों और पत्रों से अनजान हैं, या फिर जानबूझकर सच छिपाने के लिए ऐसे अनर्गल दावे कर रहे हैं?
“रायपुर में ज्यादा व्यापारी हैं”— हास्यास्पद तर्क पर कड़ा प्रहार :- संगठन में क्षेत्रीय संतुलन और निष्पक्षता के सवाल पर अध्यक्ष पक्ष द्वारा यह तर्क देना कि “रायपुर में व्यापारी अधिक हैं”, चेम्बर के भीतर मजाक का विषय बन गया है। इस हास्यास्पद दलील का करारा जवाब देते हुए कमल सोनी ने स्पष्ट किया कि चेम्बर पूरे छत्तीसगढ़ के व्यापारियों का प्रतिनिधित्व करता है, न कि किसी एक शहर का। किसी क्षेत्र विशेष के संख्याबल की आड़ लेकर बाकी जिलों के हक पर पर्दा डालने का यह तर्क पूरी तरह बेतुका साबित हो रहा है।
डेढ़ साल की टालमटोल: आखिर कार्यकारिणी से क्यों डर रहे हैं अध्यक्ष? कमल सोनी ने उजागर किया कि पिछले डेढ़ साल से लगातार पत्राचार के बावजूद धारा 9(1) और धारा 15 के संशोधन विषय को आगे नहीं बढ़ाया गया। नियम के मुताबिक आमसभा से पहले इस विषय को कार्यकारिणी के समक्ष रखा जाना अनिवार्य है, लेकिन नेतृत्व इससे बचता दिख रहा है। सोनी का सीधा सवाल है— अगर नेतृत्व वास्तव में बदलाव के पक्ष में है, तो इसे कार्यकारिणी के पटल पर रखने से क्यों कतरा रहा है?
बिलासपुर की उपेक्षा पर दोहरी नीति उजागर छत्तीसगढ़ के औद्योगिक और व्यापारिक संतुलन पर बात करते हुए कमल सोनी ने कहा कि यदि दुर्ग से राजनांदगांव तक विकास देखा जा सकता है, तो बिलासपुर और उसके औद्योगिक पार्कों (SCR) की उपेक्षा क्यों? रायपुर से बिलासपुर तक के व्यापारिक हितों को एक नजर से देखने की मांग उठाकर सोनी ने क्षेत्रीय भेदभाव के रवैये को नंगा कर दिया है।
“पद छोड़ा है, व्यापारियों के हित का संकल्प नहीं”:- कमल सोनी ने स्पष्ट कर दिया है कि उनका इस्तीफा किसी व्यक्तिगत स्वार्थ या पद की लालसा के लिए नहीं था। उन्होंने कहा, “मेरा संघर्ष बिलासपुर सहित पूरे छत्तीसगढ़ के व्यापारियों को समान हक दिलाने का है। पद छोड़ दिया है, लेकिन व्यवस्था बदलकर ही दम लेंगे।” अब वे इस संशोधन ड्राफ्ट को छत्तीसगढ़ की सभी 22 इकाइयों के पास ले जाकर व्यापक जनसमर्थन जुटाने की तैयारी में हैं।
कमल सोनी के इस कदम से स्पष्ट है कि वे सिद्धांतों और व्यापारियों के हितों के लिए पद का त्याग करने से भी पीछे नहीं हटे, जबकि दूसरी तरफ अध्यक्ष सतीश थौरानी के खोखले दावे और टालमटोल वाली नीति उनकी प्रशासनिक विफलता को उजागर कर रही है।




