
राजधानी के गोलबाजार स्थित मशहूर ‘रिलायंस ज्वेलर्स’ में लाखों रुपये के सोने के गहनों की फर्जीवाड़े का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। स्टोर के ही एक पूर्व कर्मचारी ने बड़ी चालाकी से असली सोने के कंगनों की जगह उसी वजन और डिजाइन के नकली कंगन रख दिए और कंपनी को लगभग ₹17.50 लाख का चूना लगा दिया।
गोलबाजार पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए आरोपी पूर्व कर्मचारी को गिरफ्तार कर लिया है और उसके पास से ₹14.50 लाख कीमत का 80 ग्राम सोना बरामद किया है। हैरानी की बात यह है कि आरोपी पुलिस और कानून से बचने के लिए AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) प्लेटफॉर्म्स की मदद ले रहा था।

कर्ज़ के बोझ ने बनाया शातिर अपराधी
पुलिस जांच में सामने आया कि गिरफ्तार आरोपी मनोज यादव वर्ष 2017 से रिलायंस ज्वेलर्स में काम कर रहा था। वह स्टोर के कामकाज और ग्राहकों की जानकारी से अच्छी तरह वाकिफ था।
- ऐसे शुरू हुई ठगी: आरोपी पर काफी कर्ज़ था। उसने सबसे पहले कंपनी की ‘मंथली डिपॉजिट स्कीम’ के तहत ग्राहकों द्वारा जमा की गई रकम का इस्तेमाल अपने व्यक्तिगत खर्चों और कर्ज़ उतारने में करना शुरू किया।
- नकली कंगन से बदली असली किस्मत: जब ग्राहकों ने जमा पैसों के बदले गहनों की मांग की, तो मनोज ने स्टोर में रखे 103 ग्राम से अधिक वजन के 22 कैरेट सोने के तीन सेट (5 नग) असली कंगनों की जगह नकली कंगन रख दिए और असली सोना गायब कर दिया।
कंपनी की यूनिफॉर्म पहनकर जाता था मेल्टिंग सेंटर
आरोपी कितना शातिर था, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह रिलायंस ज्वेलर्स की आधिकारिक यूनिफॉर्म पहनकर ही स्वर्ण शोधन (सोना गलाने वाले) सेंटर जाता था। चूंकि वह अक्सर कंपनी के काम से वहां जाता रहता था, इसलिए किसी को उस पर शक नहीं हुआ। उसने वहां असली सोना गलवाया और उसे ग्राहकों के लेन-देन में इस्तेमाल कर लिया।
महिला ग्राहकों से छल और फर्जी बिल का खेल
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि आरोपी ने किश्तों पर गहने खरीदने वाली दो महिला ग्राहकों को भी चूना लगाया। उसने उनसे पैसे तो ले लिए, लेकिन उन्हें कंपनी के फर्जी बिल थमा दिए। पुलिस ने जब रिलायंस ज्वेलर्स से उन बिलों का सत्यापन कराया तो वे पूरी तरह फर्जी पाए गए। इसके बाद पुलिस ने मामले में धाराएं और बढ़ा दीं।
पुलिस से बचने के लिए AI और गूगल की ली मदद!
जब पुलिस ने आरोपी मनोज यादव का मोबाइल जब्त कर उसका तकनीकी विश्लेषण किया, तो एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया। आरोपी गिरफ्तारी, पुलिस जांच, जमानत के नियमों और पूछताछ से बचने के तरीकों के बारे में ऑनलाइन तथा AI प्लेटफॉर्म्स पर सर्च कर रहा था। हालांकि, उसकी यह चालाकी पुलिस के सामने नहीं चल सकी।
पुलिस की कार्यवाही और बरामदगी
डीसीपी सेंट्रल जोन तारकेश्वर पटेल के निर्देश पर गोलबाजार पुलिस की टीम ने जब कड़ाई से पूछताछ की और स्टॉक ऑडिट व तकनीकी साक्ष्य सामने रखे, तो आरोपी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया।
- क्या-क्या हुआ बरामद:
- आरोपी के मोबाइल फोन (रेडमी)।
- फर्जी बिलों के जरिए बेचे गए लगभग 80 ग्राम सोने के आभूषण (अनुमानित कीमत ₹14.50 लाख)।
पुलिस ने आरोपी मनोज यादव के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उसे अदालत में पेश किया, जहां से उसे जेल (न्यायिक रिमांड) भेज दिया गया है। मामले में अन्य संभावित पीड़ितों की भी जांच की जा रही है।
💡 पाठकों के लिए सतर्कता और जागरूकता (सुरक्षा टिप्स)
किसी भी प्रतिष्ठित या बड़े ज्वेलरी स्टोर से खरीदारी या स्कीम में पैसे लगाते समय इन बातों का ध्यान जरूर रखें:
- आधिकारिक रसीद ही लें: किसी भी कर्मचारी को व्यक्तिगत रूप से नकद या ऑनलाइन भुगतान न करें। हमेशा स्टोर के आधिकारिक काउंटर पर ही भुगतान करें और कंप्यूटर जनरेटेड पक्की रसीद लें।
- बिल का सत्यापन करें: यदि आपको किसी बिल या रसीद पर संदेह हो, तो तुरंत स्टोर मैनेजर या कंपनी के कस्टमर केयर से संपर्क कर उसकी पुष्टि करें।
- व्यक्तिगत विश्वास से बचें: कर्मचारी कितना भी पुराना या परिचित क्यों न हो, वित्तीय लेन-देन हमेशा कंपनी के नियमों के अनुसार ही करें।



