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फाइलों को दबाने की थानों की प्रथा पर हाई कोर्ट की पुलिस महानिदेशक पर तीखी टिप्पणी:पूछा—जांच पूरी होने के बावजूद 1.45 लाख मामले बिना क्लोजर रिपोर्ट क्यों लटके?

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य पुलिस प्रशासन और पुलिस महानिदेशक (DGP) को एक बेहद महत्वपूर्ण मामले में बीते दिन सख्त निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने उन सभी मामलों पर अपडेटेड स्टेटस रिपोर्ट मांगी है, जिनकी पुलिस जांच तो पूरी हो चुकी है, लेकिन अब तक संबंधित अदालतों में खात्मा रिपोर्ट (Closure Report) दाखिल नहीं की गई है।
हाईकोर्ट के इस रुख से साफ है कि जांच पूरी होने के बाद फाइलों को दबाकर रखने की प्रथा पर अब गाज गिरने वाली है।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला योगेंद्र बाबू शर्मा द्वारा दायर एक रिट याचिका से जुड़ा है:

  • याचिकाकर्ता की मांग: रायपुर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) को निर्देश दिया जाए कि वे एक मामले में सौंपी गई क्लोजर रिपोर्ट पर निर्णय लें और दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 173(2) के तहत जताई गई आपत्ति (Objection) का निस्तारण करें।
  • अदालत का संज्ञान: सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच के सामने यह बात आई कि राज्य में ऐसे मुकदमों की संख्या बहुत बड़ी है, जिनकी जांच पूरी होने के बाद भी क्लोजर रिपोर्ट अदालत तक नहीं पहुंची है।
  • DGP को निर्देश: हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य के पुलिस महानिदेशक से पूरे प्रदेश का डेटा और जवाब तलब किया था।

DGP के हलफनामे में खुले बड़े आंकड़े

हाईकोर्ट के कड़े निर्देश के बाद छत्तीसगढ़ के DGP ने राज्य भर का रिकॉर्ड जुटाकर अदालत में एक हलफनामा (Affidavit) दाखिल किया। इस हलफनामे से राज्य में लंबित मामलों की भयावह तस्वीर सामने आई:

  • 1.45 लाख से ज्यादा केस पेंडिंग: आंकड़े बताते हैं कि 16 जुलाई 2026 तक पूरे राज्य में ऐसे 1,45,097 मामले हैं, जिनकी पुलिस जांच पूरी हो चुकी है, लेकिन क्लोजर रिपोर्ट कोर्ट में पेश नहीं की गई है।
  • धीमी गति से निपटारा: इससे पहले 20 मई 2026 को यह आंकड़ा 1,47,714 था। यानी दो महीनों में सिर्फ 2,617 मामलों में ही क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की जा सकी।
  • प्रशासनिक निर्देश: DGP ने कोर्ट को बताया कि रायपुर पुलिस कमिश्नर, सभी रेंज के IG और जिलों के SP को सख्त निर्देश जारी किए गए हैं ताकि चार्जशीट या क्लोजर रिपोर्ट समय पर दाखिल हो और इसकी लगातार समीक्षा की जाए।

हाईकोर्ट का नया आदेश और अगली सुनवाई

हाईकोर्ट ने आंकड़ों पर गौर करने के बाद माना कि हालांकि बैकलॉग में थोड़ी कमी आई है, लेकिन अभी भी 1.45 लाख से अधिक मामले पेंडिंग रहना एक गंभीर चिंता का विषय है।

हाईकोर्ट का निर्देश:
डिवीजन बेंच ने छत्तीसगढ़ DGP को आदेश दिया है कि वे अगली सुनवाई से ठीक पहले एक नया और अपडेटेड हलफनामा कोर्ट में जमा करें, जिसमें प्रगति की ताज़ा रिपोर्ट पेश की जाए।

मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त 2026 तय की गई है।

इस कदम का आम जनता पर असर

  1. फाइलों की धूल होगी साफ: पुलिस थानों में जांच पूरी होने के बावजूद सालों से लंबित पड़े मामलों का निपटारा तेजी से होगा।
  2. पीड़ितों को त्वरित न्याय: जब तक कोर्ट में क्लोजर या चार्जशीट रिपोर्ट दाखिल नहीं होती, तब तक पीड़ित या आरोपी कानूनी अनिश्चितता में फंसे रहते हैं। इस सख्ती से आम नागरिकों को राहत मिलेगी।
  3. पुलिस जवाबदेही: थानों, SP और IG स्तर पर मानिटरिंग सख्त होने से जांच अधिकारियों की लापरवाही पर लगाम लगेगी।

मुख्य बातें (At a Glance)

  • अदालत: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट (चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल)
  • अहम आंकड़ा: 1,45,097 ऐसे केस जिनकी जांच पूरी, पर क्लोजर रिपोर्ट कोर्ट में पेश नहीं।
  • मुख्य पक्षकार: पुलिस महानिदेशक (DGP), छत्तीसगढ़
  • अगली सुनवाई की तारीख: 18 अगस्त 2026
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