न्यायधानी

चोरी के आभूषणों के सौदों में घिरे ‘दिव्या ज्वेलर्स’ पर बिलासपुर सराफा एसोसिएशन का बड़ा एक्शन, सदस्यता से किया बेदखल

बिलासपुर: शहर के प्रसिद्ध सराफा बाजार से एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। चोरी के सोने-चांदी के आभूषणों की खरीद-फरोख्त और पुलिस की बरामदगी से जुड़े मामलों को लेकर बिलासपुर सराफा एसोसिएशन ने कड़ा रुख अपनाया है। एसोसिएशन ने सरकंडा स्थित ‘दिव्या ज्वेलर्स’ की प्राथमिक सदस्यता को तत्काल प्रभाव से समाप्त करते हुए उसे संगठन से बाहर (निष्कासित) कर दिया है।सराफा एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष श्री कमल सोनी ने इस संबंध में प्रेस विज्ञप्ति जारी कर मामले की पूरी जानकारी दी और पुलिस प्रशासन से निष्पक्ष व कठोर जांच की मांग की है।

क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला?

एसोसिएशन के अनुसार, सरकंडा स्थित दिव्या ज्वेलर्स से लगातार चोरी के आभूषणों की खरीद-फरोख्त और पुलिस जब्ती के मामले सामने आ रहे थे। हाल ही में 04 अगस्त 2026 को भी ऐसा ही एक नया मामला प्रकाश में आया। बार-बार इस तरह की आपराधिक गतिविधियों में नाम आने के कारण पूरे सराफा समाज और सालों से ईमानदारी से व्यापार कर रहे व्यापारियों की साख पर बुरा असर पड़ रहा था। व्यापारिक नैतिकता, सराफा समाज की गरिमा और ईमानदार व्यापारियों के हितों की रक्षा के लिए एसोसिएशन ने यह सख्त फैसला लिया है।

पुलिस अधीक्षक से निष्पक्ष और वैज्ञानिक जांच की मांग

कमल सोनी ने बिलासपुर पुलिस अधीक्षक (SP) को एक औपचारिक पत्र प्रेषित कर इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करने की अपील की है। उन्होंने कहा:

प्रदेश सर्राफा संघ प्रमुख कमल सोनी
  • चोरी का माल खरीदने और बेचने वाले पूरे सिंडिकेट पर प्रभावी अंकुश लगाया जाए।
  • मामले की निष्पक्ष, वैज्ञानिक और गहनता से जांच की जाए ताकि असल दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई हो सके।

एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में उक्त प्रतिष्ठान (दिव्या ज्वेलर्स) की किसी भी अनैतिक या गैर-कानूनी गतिविधि से बिलासपुर सराफा एसोसिएशन या छत्तीसगढ़ सराफा एसोसिएशन का कोई लेना-देना नहीं होगा और न ही संगठन उनका कोई समर्थन करेगा।

गोल्ड लोन कंपनियों और बैंकों पर भी उठे सवाल

प्रेस विज्ञप्ति में वित्तीय संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की गई है। हाल ही में आयोजित राज्य स्तरीय सराफा महासम्मेलन का हवाला देते हुए कमल सोनी ने कहा कि कई गोल्ड लोन देने वाले बैंक और प्राइवेट कंपनियां बिना सही वेरिफिकेशन और पक्के दस्तावेजों के आभूषण स्वीकार कर लेते हैं। इस ढिलाई के कारण चोर आसानी से चोरी का सोना गिरवी रखकर पैसे ऐंठ लेते हैं। संगठन ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि गोल्ड लोन देने वाली सभी संस्थाओं के लिए एक कड़ा वेरिफिकेशन सिस्टम और मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) अनिवार्य रूप से लागू की जाए।

ग्राहकों और पाठकों के लिए जरूरी सावधानियां (जनहित में जारी):

अगर आप भी सोने-चांदी के गहने खरीदने या बेचने जा रहे हैं, तो इन बातों का विशेष ध्यान रखें:

  • बिल जरूर लें: किसी भी दुकान से आभूषण खरीदते समय हमेशा पक्का जीएसटी (GST) बिल लें।
  • हॉलमार्क की जांच करें: बिना BIS हॉलमार्क वाले गहने खरीदने से बचें।
  • सस्ते के चक्कर में न पड़ें: यदि कोई व्यक्ति या अनधिकृत व्यापारी बाजार मूल्य से काफी कम कीमत पर सोना-चांदी बेचने का लालच दे, तो सतर्क हो जाएं। चोरी का माल खरीदना या बेचना कानूनन अपराध है।
  • सत्यापन जरूर करें: पुराने आभूषण बेचते या एक्सचेंज करते समय अपनी सही पहचान (आधार कार्ड आदि) और पुरानी रसीद जरूर साथ रखें।
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