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छत्तीसगढ़ के बाघमारा (सोनाखान) और कांकेर में सोने की खोज: वेदांता ने पोर्टेबल रिग तकनीक का किया इस्तेमाल।

छत्तीसगढ़ की धरती से एक बार फिर बहुमूल्य खनिज निकालने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। उद्योगपति अनिल अग्रवाल की कंपनी वेदांता लिमिटेड ने राज्य के बलौदा बाज़ार जिले के बाघमारा (सोनाखान) और उत्तर कांकेर क्षेत्र में सोने और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) की खोज तेज कर दी है। इस खोज कार्य को आसान और तेज बनाने के लिए कंपनी ने भारत में पहली बार हाई-स्पीड हाइड्रोस्टैटिक पोर्टेबल रिग (High-Speed Hydrostatic Portable Rig) तकनीक का इस्तेमाल शुरू किया है।

क्या है यह नई तकनीक और कैसे हो रही है खोज?

  • पोर्टेबल रिग मशीन: यह एक हल्की और आधुनिक ड्रिलिंग मशीन है, जिसे घने जंगलों या पहाड़ी इलाकों में आसानी से ले जाया जा सकता है।
  • गहराई तक ड्रिलिंग: यह मशीन ज़मीन के भीतर 1,000 मीटर (1 किलोमीटर) की गहराई तक जाकर मिट्टी व चट्टानों के नमूने ले सकती है।
  • समय की बचत: इसे एक जगह से दूसरी जगह ले जाने में बहुत कम समय लगता है, जिससे अन्वेषण (Exploration) का काम तेज़ी से पूरा होगा।

इस प्रोजेक्ट से क्या होंगे लाभ?

  1. राज्य को राजस्व (Revenue): कमर्शियल माइनिंग शुरू होने पर छत्तीसगढ़ सरकार को रॉयल्टी के रूप में भारी राजस्व मिलेगा, जिसका इस्तेमाल विकास कार्यों में हो सकेगा।
  2. स्थानीय रोज़गार: खनन और खोज की प्रक्रियाओं से स्थानीय युवाओं के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोज़गार के नए अवसर पैदा होंगे।
  3. देश की आत्मनिर्भरता: भारत वर्तमान में अपनी ज़रूरत का अधिकांश सोना और क्रिटिकल मिनरल्स आयात करता है। देश के भीतर उत्पादन बढ़ने से विदेशी मुद्रा की बचत होगी।
  4. क्षेत्रीय विकास: परियोजना के कारण आसपास के ग्रामीण इलाकों में सड़कें, बिजली और बुनियादी सुविधाएं बेहतर होंगी।

संभावित चुनौतियां और चिंताएं

  1. पर्यावरण और जंगलों पर असर: सोनाखान और कांकेर के कई हिस्से घने जंगलों से ढके हैं। खनन गतिविधियों से पेड़-पौधों और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास पर असर पड़ सकता है।
  2. जल संसाधनों पर प्रभाव: ज़मीन के अंदर गहरी ड्रिलिंग और खनन प्रक्रिया से स्थानीय जलस्तर और आसपास के जल स्रोतों के दूषित होने का जोखिम रहता है।
  3. स्थानीय निवासियों का विस्थापन: यदि बड़े पैमाने पर खदानें विकसित होती हैं, तो आसपास की बसाहटों और कृषि भूमि पर प्रभाव पड़ सकता है, जिसके लिए उचित पुनर्वास बेहद ज़रूरी होगा।

आगे क्या होगा?

वर्तमान में वेदांता द्वारा केवल खोज और मैपिंग (Exploration & Sampling) का काम किया जा रहा है ताकि यह सटीक आकलन लगाया जा सके कि ज़मीन के नीचे सोना कितनी मात्रा और गुणवत्ता में उपलब्ध है। नमूनों की जांच के बाद ही पूर्ण स्तर पर माइनिंग की रूपरेखा तैयार की जाएगी।

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