
सोचिए, अगर आम जनता एकाध महीने बिजली का बिल न भरे, तो तुरंत लाइन काट दी जाती है। लेकिन जब बात सरकारी विभागों की हो, तो बकाया का आंकड़ा करोड़ों में पहुँच जाता है। छत्तीसगढ़ में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जहाँ छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी (CSPDCL) ने बकाएदारों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए 10,000 से अधिक सरकारी दफ्तरों के बिजली कनेक्शन काट दिए।
राज्य के अलग-अलग सरकारी विभागों पर कुल ₹3,432 करोड़ से अधिक का बिजली बिल पेंडिंग है। जब विभाग नींद से जागे और करीब ₹51 करोड़ की त्वरित अदायगी की, तब जाकर कुछ दफ्तरों में दोबारा रौशनी लौटी।
सबसे बड़े बकाएदार: कौन-कौन शामिल?
पावर कंपनी के आंकड़ों के मुताबिक, राज्य के लगभग 39 विभाग इस बकाए की सूची में शामिल हैं। इनमें से सबसे ज्यादा बकाया इन दो विभागों पर है:
- नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग: यह विभाग बकाएदारों की सूची में सबसे ऊपर है। इस अकेले विभाग पर ₹1,674 करोड़ से अधिक का बिल बकाया है। इसमें शहरों के वॉटर फिल्टर प्लांट, स्ट्रीट लाइट और निकाय कार्यालयों की बिजली का खर्च शामिल है।
- पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग: ग्रामीण इलाकों की जिम्मेदारी संभालने वाले इस विभाग पर ₹1,057 करोड़ से अधिक का बिल लंबित है।
- अन्य प्रमुख विभाग: लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE), स्कूल शिक्षा और गृह विभाग (पुलिस) सहित अन्य विभागों पर बाकी का करीब ₹1,758 करोड़ बकाया है।
आम जनता के लिए राहत की बात:
अस्पतालों, पीने के पानी की आपूर्ति (नल-जल योजना) और स्कूलों जैसी अति-आवश्यक सेवाओं के कनेक्शन सीधे नहीं काटे गए हैं, ताकि आम नागरिकों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
अब लागू होगा ‘प्री-पेड मीटर’ का नया नियम
बार-बार की इस सिरदर्दी और अरबों रुपये के बकाए से निपटने के लिए सरकार ने अब स्थायी रास्ता खोज निकाला है।
1 अगस्त से सभी सरकारी दफ्तरों में स्मार्ट प्री-पेड बिजली मीटर अनिवार्य किए जा रहे हैं। इसका सीधा मतलब है—”पहले रिचार्ज कराओ, फिर बिजली पाओ।” नए नियम के तहत हर विभाग को कम से कम 3 महीने का अग्रिम (Advance) बिल जमा रखना होगा। अगर बैलेंस खत्म हुआ, तो सिस्टम अपने आप बिजली बंद कर देगा।




