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मरवाही के जंगलों में दिखा दुनिया का सबसे ‘निडर’ जीव: शेर भी जिससे खौफ खाते हैं, वो ‘हनी बैजर’ अब छत्तीसगढ़ में!

- छत्तीसगढ़ की धरती और यहां के घने जंगलों ने आज पूरी दुनिया के वन्यजीव प्रेमियों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। मरवाही वनमंडल के उसाड़ गांव में एक ऐसा दुर्लभ नजारा देखने को मिला है, जिसने विशेषज्ञों को भी हैरान कर दिया है। यहां प्रकृति का सबसे ‘बहादुर योद्धा’ कहे जाने वाले हनी बैजर (रैटल) का जोड़ा देखा गया है।
क्यों खास है हनी बैजर?
हनी बैजर कोई साधारण वन्यजीव नहीं है। इसे दुनिया का सबसे निडर जानवर माना जाता है। आकार में छोटा होने के बावजूद इसके तेवर ऐसे हैं कि जंगल के राजा शेर और खूंखार लकड़बग्घे भी इससे पंगा लेने से बचते हैं। - निडर स्वभाव: यह अपने से कई गुना बड़े शिकारी जानवरों से भिड़ जाता है।
- हथियार जैसी त्वचा: इसकी खाल इतनी मोटी और सख्त होती है कि मधुमक्खियों के डंक या सांप के दांत भी इसे आसानी से बेध नहीं पाते।
- शहद का शौकीन: जैसा कि नाम से ही साफ है, इसे मधुमक्खी के छत्तों से शहद चुराकर खाना बेहद पसंद है।
- जहर का असर नहीं: यह कोबरा जैसे जहरीले सांपों को भी मारकर खा जाता है और उनके जहर का इस पर मामूली असर ही होता है।
मरवाही में दिखा ‘पावर कपल’
मरवाही रेंज के उसाड़ गांव में जब ग्रामीणों ने इस जोड़े को देखा, तो पहले तो वे दंग रह गए। ग्रामीणों ने सूझबूझ दिखाते हुए मोबाइल पर इस दुर्लभ जीव के फोटो और वीडियो बनाए, जिससे इनके यहां होने की आधिकारिक पुष्टि हो पाई। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम ने मोर्चा संभाला और सुरक्षा के साथ इस जोड़े को वापस गहरे जंगल की ओर रवाना किया।
छत्तीसगढ़ की जैव-विविधता के लिए शुभ संकेत
वन मंत्री श्री केदार कश्यप और प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) श्री अरुण कुमार पाण्डे के नेतृत्व में प्रदेश में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में किए जा रहे प्रयास रंग ला रहे हैं। मरवाही में हनी बैजर का दिखना इस बात का सबूत है कि छत्तीसगढ़ के जंगल अब इन दुर्लभ प्रजातियों के लिए एक सुरक्षित और समृद्ध घर बन रहे हैं।
वन विभाग की अपील: दूरी बनाए रखें
मरवाही वनमंडलाधिकारी श्रीमती ग्रीष्मी चांद ने स्थानीय लोगों की सराहना करते हुए एक जरूरी अपील भी की है:
“हनी बैजर स्वभाव से बेहद आक्रामक और साहसी होते हैं। यदि आपको ये दोबारा दिखाई दें, तो इनके करीब जाने या इन्हें परेशान करने की कोशिश न करें। किसी भी वन्यजीव की सूचना तुरंत वन विभाग को दें।”



