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57 लाख की ठगी का खुलासा: बिलासपुर साइबर पुलिस ने बुलंदशहर के शातिर जालसाज को दबोचा, ऐसे चल रहा था ‘लेगेसी लोन’ ऐप का गंदा खेल

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की बिलासपुर रेंज साइबर पुलिस ने अंतर्राज्यीय ठगों के एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो आम लोगों को ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाकर लाखों की चपत लगा रहा था। पुलिस ने इस मामले में उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से एक शातिर अपराधी मनिंदर सिंह को गिरफ्तार करने में बड़ी सफलता हासिल की है। इस गिरोह ने बिलासपुर के एक नागरिक को मनी लॉन्ड्रिंग के झूठे केस में फंसाने की धमकी देकर 57 लाख रुपये की बड़ी ठगी की थी।

क्या है पूरा मामला?

सिविल लाइन थाना क्षेत्र के निवासी एक प्रार्थी को अज्ञात ठगों ने वर्चुअल नंबरों से कॉल किया। ठगों ने खुद को जांच अधिकारी बताते हुए प्रार्थी को डराया कि उनका नाम ‘मनी लॉन्ड्रिंग’ के केस में आया है। गिरफ्तारी का डर दिखाकर उन्हें घंटों ‘डिजिटल अरेस्ट’ रखा गया और केस से बचने के बदले में किश्तों में कुल 57 लाख रुपये अपने फर्जी बैंक खातों में ट्रांसफर करवा लिए।

‘लेगेसी लोन’ ऐप के जरिए खपाते थे ठगी की रकम

विवेचना के दौरान रेंज साइबर थाना की टीम ने जब बैंक खातों और तकनीकी डेटा का विश्लेषण किया, तो चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। आरोपी ठगी की रकम को सीधे अपने पास रखने के बजाय ‘लेगेसी लोन’ (Legacy Loan) नामक मोबाइल ऐप का उपयोग करते थे। ठगी के पैसों को इस ऐप के माध्यम से आम लोगों को छोटे-छोटे लोन के रूप में बांट दिया जाता था, ताकि पुलिस की नजरों से बचा जा सके और रकम को आसानी से आहरण (Withdraw) किया जा सके।

​दिल्ली और बुलंदशहर में तीन दिनों की घेराबंदी

आईजी बिलासपुर रेंज डॉ. संजीव शुक्ला और एसएसपी रजनेश सिंह के दिशा-निर्देशों पर निरीक्षक गोपाल सतपथी के नेतृत्व में एक विशेष टीम दिल्ली भेजी गई। टीम ने तीन दिनों तक लगातार संदिग्धों का पीछा किया और स्थानीय पुलिस की मदद से मनिंदर सिंह (54 वर्ष) को धर दबोचा।

​इन अधिकारियों और जवानों ने निभाई अहम भूमिका

इस बड़े ऑपरेशन को सफल बनाने में निम्नलिखित अधिकारियों और कर्मचारियों का सराहनीय योगदान रहा:

  • मार्गदर्शन: श्री निमितेश सिंह (उप पुलिस अधीक्षक)
  • नेतृत्व: निरीक्षक गोपाल सतपथी (प्रभारी रेंज साइबर थाना बिलासपुर)
  • टीम के सदस्य: एएसआई अरविंद सिंह, जीवन साहू, प्रधान आरक्षक सैयद साजिद और आरक्षक चिरंजीव कुमार।

​साइबर पुलिस की ओर से जरूरी सावधानी (एडवाइजरी)

इस मामले ने एक बार फिर ‘डिजिटल अरेस्ट’ के बढ़ते खतरों को उजागर किया है। साइबर पुलिस ने पाठकों के लिए निम्नलिखित सुझाव दिए हैं:

  1. डिजिटल अरेस्ट कुछ नहीं होता: कानून में ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसा कोई प्रावधान नहीं है। पुलिस या जांच एजेंसियां वीडियो कॉल पर किसी को गिरफ्तार नहीं करतीं।
  2. धमकी से न डरें: यदि कोई आपको सीबीआई, ईडी या पुलिस का नाम लेकर डराए, तो घबराएं नहीं। फोन काटें और स्थानीय पुलिस को सूचना दें।
  3. वित्तीय जानकारी साझा न करें: अनजान कॉल्स पर कभी भी अपने बैंक खाते की जानकारी या पैसा ट्रांसफर न करें।
  4. शिकायत कहाँ करें: यदि आप ठगी का शिकार होते हैं, तो तुरंत 1930 डायल करें या www.cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट दर्ज करें।
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