जियो-मैपिंग से होगी शुद्ध नस्ल की पहचान, बारनवापारा में ब्लैकबक की संख्या 190 पार होने पर बड़ी सफलता
छत्तीसगढ़ के राजकीय पशु, वन भैंसा (Wild Buffalo), को विलुप्त होने से बचाने के लिए राज्य सरकार ने कमर कस ली है। बीते गुरुवार को नवा रायपुर स्थित आरण्य भवन में प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) श्री अरुण कुमार पाण्डेय की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक में इसके संरक्षण, संख्या वृद्धि और स्थानांतरण के लिए एक व्यापक कार्ययोजना पर मुहर लगाई गई।
बैठक में स्पष्ट किया गया कि वन भैंसा के संरक्षण को अब मिशन मोड में किया जाएगा। मुख्य वन्यजीव वार्डन श्री पाण्डेय ने अधिकारियों को समन्वित प्रयास करने और जल्द से जल्द योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए हैं।
संरक्षण में साइंस का तड़का: जियो-मैपिंग और सैटेलाइट निगरानी
वन भैंसा की वास्तविक संख्या और ‘शुद्ध नस्ल’ की पहचान के लिए अब जियो-मैपिंग तकनीक का उपयोग किया जाएगा। यह तकनीक संरक्षण कार्यों को वैज्ञानिक आधार देगी।
स्थानांतरण में तेज़ी: उदंती-सीतानदी और बारनवापारा अभयारण्य में अनुकूल वातावरण को देखते हुए, वन भैंसों के स्थानांतरण की प्रक्रिया को तेज किया जाएगा। इसके लिए नेशनल बोर्ड ऑफ वाइल्डलाइफ और NTCA से अनुमति लेने के लिए जल्द ही एक विशेष टीम को दिल्ली भेजा जाएगा।
फुल-टाइम मेडिकल टीम: वन भैंसों के स्वास्थ्य जोखिम को कम करने के लिए दो पशु चिकित्सकों को पूर्णकालिक रूप से उपलब्ध रखने का निर्णय लिया गया है।
निगरानी प्रणाली: जंगल सफारी और अन्य स्थानों पर सैटेलाइट-आधारित निगरानी प्रणाली विकसित करने का प्रस्ताव सेंट्रल जू अथॉरिटी (CZA) को भेजा जा रहा है।
वर्तमान स्थिति: बारनवापारा अभयारण्य में इस समय 1 नर और 5 मादा वन भैंसे मौजूद हैं, जिन पर गहन निगरानी रखी जा रही है।
🎉 दूसरी बड़ी कामयाबी: काला हिरण (Blackbuck) का कुनबा बढ़ा बैठक में छत्तीसगढ़ के एक और महत्वपूर्ण वन्यजीव, काला हिरण (कृष्ण मृग), के संरक्षण पर मिली सफलता की भी चर्चा हुई।
बड़ी उपलब्धि: लगभग 50 वर्षों के बाद 2018 में शुरू किए गए पुनर्स्थापन कार्यक्रम के कारण, बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य में वर्तमान में लगभग 190 काले हिरण मौजूद हैं।
विस्तार की योजना: इस सफलता से उत्साहित होकर, वन विभाग अब अन्य अभयारण्यों में भी काले हिरण को पुनर्स्थापित करने की योजना बना रहा है। इस महत्वपूर्ण बैठक में वन्यजीव विशेषज्ञ, वैज्ञानिक और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहे, जो छत्तीसगढ़ के वन्यजीव संरक्षण के लिए एक बड़ा कदम है।