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आधार कार्ड: फजीहत का फ़ॉर्मेट, अपडेट का महा-ड्रामा और 140 करोड़ की जेब पर ‘फीस’ वाला खेल!

UIDAI के सीईओ ने हाल ही में ऑनलाइन कॉन्फ़्रेंस में घोषणा की है कि दिसंबर 2025 से आधार कार्ड के डिज़ाइन और अपडेट प्रक्रिया को लेकर कुछ नए नियम लागू किए जाएँगे। इस घोषणा पर देश की 140 करोड़ जनता का सामूहिक माथा ठनका है!जनता के बीच अब यह आम धारणा बन गई है कि हमारा जन्म, शिक्षा और रोज़गार… सब कुछ बस एक ही लक्ष्य के लिए है: आधार कार्ड को ‘सुधरवाना’! देश का अधिकांश समय सिर्फ़ कागज़ I’d कार्ड बनवाने और फिर उसे बार-बार अपडेट करवाने में ही ख़त्म हो रहा है।

आधार’अपडेट ड्रामा’ का अंतहीन चक्र:- यह कैसी सरकारी प्रक्रिया है, जहाँ जनता को साल में चार-चार बार एक ही फ़ॉर्म भरने और एक ही लाइन में लगने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है? यह छोटी-छोटी चीज़ों का महा-ड्रामा देश की जनता को उलझाए रखा हुआ है।अब नया क्यूआर कोड-आधारित आधार आने की बात हो रही है, जहाँ व्यक्तिगत जानकारी नहीं छपेगी। क्या यह सब बेवकूफ़ी नहीं है? अगर कार्ड खो जाए, तो हम अपनी पहचान कैसे साबित करेंगे, जब तक कि कोई ऐप स्कैन न कर ले? लोगों का मानना है कि यह सब हमें लाइन में लगाने और हमारा समय बर्बाद करने का एक और तरीका है।

140 करोड़ की जेब’ पर ‘शुल्क’ का महा-खेल
आधार अपडेट के लिए बार-बार शुल्क (₹75, ₹125) लिए जाने पर गहरा रोष है। जनता सवाल कर रही है:

  • सुधार की आड़ में 140 करोड़ जनता से पुनः शुल्क लिया जाना क्या सिर्फ़ पूंजी वसूलने की मंशा को दर्शाता है?
  • आधार सेवाओं की लागत के नाम पर वसूला गया यह छोटा सा शुल्क, जब 140 करोड़ बार गुणा होता है, तो अरबों का एक ‘महा-शुल्क’ बन जाता है।
    जनता का मानना है कि उन्हें बेवकूफ़ समझा जा रहा है, और इन फ़ॉर्मों और फ़ोटोकॉपी के नाम पर उनसे अरबों की लूट की जा रही है। अगर सुधार आवश्यक है, तो शुल्क लगाकर जनता पर अतिरिक्त बोझ डालना कतई उचित नहीं है।
    🤯 जनता का आक्रोश: ये कागज़ बेकार हैं!
    लोगों के बीच यह भावना प्रबल है कि बार-बार नियम बदलना, लोगों को लाइन में लगाना और फिर हर बार शुल्क लेना, यह साबित करता है कि सरकार ही ‘बौखला गई है’। वोटर आईडी को आधार से लिंक करने की चिंता भी इस प्रक्रिया को और जटिल बना रही है।
    कुल मिलाकर, आधार कार्ड अब भारत में पहचान का प्रमाण कम और सरकार द्वारा जनता को उलझाए रखने का एक उपकरण ज़्यादा बन गया है।
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