अपराधराजधानी

मैनेजर ने ही कंपनी को 15 लाख का चूना लगाया, खुद की कंपनी खोली,हुवा गिरफ्तार

रायपुर: क्या आपकी कंपनी में सब कुछ सुरक्षित है? रायपुर में एक ऐसी ही चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहाँ एक भरोसेमंद मैनेजर ने अपनी ही कंपनी को 15 लाख रुपये की बड़ी चपत लगाई और फिर उसी पैसे से अपनी खुद की कंपनी शुरू करने लगा!                                                💰 गबन का ‘मास्टरमाइंड’ आखिरकार गिरफ्तार!                       रायपुर पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए, पिछले 6 महीनों से फरार चल रहे आरोपी संदीप कुमार कश्यप को धर दबोचा है। कश्यप, जो भूटानी इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड के रायपुर ब्रांच में मैनेजर के पद पर था, उसने कंपनी के साथ विश्वासघात करते हुए इस बड़े घोटाले को अंजाम दिया।                                                                                                          💸 कैसे दिया 15 लाख रुपये के गबन को अंजा:-आरोपी संदीप कुमार कश्यप ने वर्ष 2021 से मई 2025 के बीच अपनी मैनेजर की पोजीशन का बेजा इस्तेमाल किया। वह कंपनी के सामान को ग्राहकों को बेचता था, लेकिन:

  • पेमेंट सीधे अपने खाते में: वह ग्राहकों से QR कोड, पेटीएम और ऑनलाइन माध्यमों से सीधा अपने निजी बैंक खाते में भुगतान लेता था, न कि कंपनी के खाते में।
  • बिल-बिलकुल गायब: उसने बेचे गए माल का कोई बिल या लेखा-जोखा कंपनी के रिकॉर्ड में दर्ज नहीं किया।
  • खुद का व्यवसाय किया शुरू: गबन की गई लगभग 15 लाख रुपये की बड़ी रकम का उपयोग उसने अपनी खुद की कंपनी शुरू करने और चलाने में किया, जिससे भूटानी इंटरनेशनल को भारी आर्थिक नुकसान हुआ।
    जैसे ही कंपनी प्रबंधन को इस बड़े ‘अमानत में खयानत’ की जानकारी मिली, आरोपी संदीप कुमार कश्यप कंपनी छोड़कर फरार हो गया था।
    🚨 कानूनी शिकंजा और गिरफ्तारी
    प्रार्थी शिवम भूटानी की ओर से 17.05.2025 को खमतराई थाने में धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया गया था। पुलिस तब से ही आरोपी की तलाश में जुटी थी। बैंक स्टेटमेंट और गहन जांच के बाद, पुलिस को सूचना मिली कि आरोपी कैलाश नगर, बीरगांव, रायपुर में छिपा हुआ है।
    पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी संदीप कुमार कश्यप (उम्र 40 वर्ष) को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। अब उसे न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है।

रायपुर पुलिस की बड़ी चेतावनी: इस गिरफ्तारी से यह स्पष्ट है कि धोखाधड़ी करने वाले, चाहे कितने भी प्रभावशाली पद पर क्यों न हों, कानून के शिकंजे से बच नहीं सकते।

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