जांजगीर-चांपा पुलिस की बड़ी सफलता: 10 लाख की लूट का 7 दिनों में पर्दाफाश!

जांजगीर-चांपा: गणेश विसर्जन की रात, नैला गली के एक शांत मोहल्ले में हुए एक सनसनीखेज लूटकांड ने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया था। लेकिन जांजगीर-चांपा पुलिस ने महज सात दिनों के भीतर इस वारदात का न सिर्फ पर्दाफाश किया, बल्कि लूटी गई पूरी रकम भी बरामद कर अपराधियों को सलाखों के पीछे भेज दिया। पुलिस की इस तत्परता और कुशल रणनीति ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि अपराधी चाहे कितने भी शातिर क्यों न हों, कानून के लंबे हाथ से बच नहीं सकते।
क्या थी वारदात?
यह घटना 6 सितंबर, 2025 की रात करीब 9:15 बजे की है। व्यापारी अरुण कुमार अग्रवाल अपनी दुकान से दिन भर की कमाई लेकर स्कूटी से घर जा रहे थे। नैला गली के सुनसान रास्ते पर पहले से घात लगाए बैठे लुटेरों ने उन्हें रोका, चाकू की नोक पर धमकाया और उनके बैग में रखे 10 लाख रुपये से अधिक की रकम लूटकर फरार हो गए।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। खुद पुलिस अधीक्षक श्री विजय कुमार पाण्डेय और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री उमेश कुमार कश्यप तत्काल मौके पर पहुंचे। उन्होंने घटनास्थल का बारीकी से मुआयना किया और उसी रात अपराधियों को पकड़ने के लिए चार विशेष टीमें गठित कीं।
कैसे सुलझी गुत्थी?
पुलिस की टीमें अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक उमेश कुमार कश्यप के कुशल मार्गदर्शन में तुरंत काम पर लग गईं। उन्होंने पारंपरिक और आधुनिक, दोनों तरीकों का इस्तेमाल किया।
- CCTV फुटेज: पुलिस ने घटना स्थल और उसके आसपास के सभी सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले। इससे अपराधियों के भागने के संभावित रास्तों का पता चला।
- गहन पूछताछ: पुलिस ने व्यापारी के दुकान और घर के मौजूदा और पूर्व कर्मचारियों से बारीकी से पूछताछ की। साथ ही, इलाके के आदतन बदमाशों और संदिग्धों पर भी नजर रखी गई।
- साइबर टीम की भूमिका: जांजगीर की साइबर टीम की सक्रियता से एक महत्वपूर्ण सुराग मिला। तकनीकी विश्लेषण और गोपनीय सूत्रों से पता चला कि इस वारदात के पीछे व्यापारी का ही एक पूर्व कर्मचारी और नैला क्षेत्र के कुछ कुख्यात बदमाश शामिल थे।
- घटना का रीक्रिएशन: पुलिस ने घटना को फिर से दोहराया, जिससे उन्हें अपराधियों की रणनीति और भागने के तरीके का अनुमान लगाने में मदद मिली। इसी से पुलिस को एक अहम सुराग मिला, जिसने जांच की दिशा ही बदल दी।
मास्टरमाइंड का चौंकाने वाला खुलासा
जांच में पता चला कि इस लूट का मास्टरमाइंड कोई और नहीं, बल्कि व्यापारी का ही एक पूर्व कर्मचारी था, जो विधि विरुद्ध संघर्षरत बालक है। उसने अपने साथियों के साथ 17 दिन पहले ही पूरी साजिश रच ली थी। उसने अपने साथियों को बताया था कि व्यापारी रोज रात को स्कूटी पर लाखों रुपये लेकर घर जाता है और वह स्वभाव से डरपोक है।
घटना के दिन, मास्टरमाइंड पूर्व कर्मचारी एक दिन के लिए काम पर आया था। जैसे ही व्यापारी पैसे लेकर दुकान से निकले, उसने अपने साथियों को फोन पर इसकी सूचना दे दी, जो पहले से ही मौके पर इंतजार कर रहे थे।
अपराधियों की गिरफ्तारी और बरामदगी
पुलिस ने इस जानकारी के आधार पर तत्काल घेराबंदी की और मास्टरमाइंड, मुकेश सूर्यवंशी (19), और नितेश पंडित उर्फ विक्की (21) को धर दबोचा। पूछताछ में उन्होंने अपना जुर्म कबूल कर लिया।
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के पास से लूटी गई पूरी रकम, 10 लाख 44 हजार रुपये, और वारदात में इस्तेमाल की गई मोटरसाइकिल और चाकू भी बरामद कर लिए।
पुलिस ने अपनी जांच को और आगे बढ़ाया तो पता चला कि इन अपराधियों का हाथ एक और चोरी में था। 18 जुलाई, 2025 को बोड़सरा शराब दुकान से 2.40 लाख रुपये की चोरी को भी इन्होंने अंजाम दिया था। पुलिस ने उस मामले में भी 64,000 रुपये बरामद किए हैं।
पुलिस टीम को सलाम!
इस बड़ी सफलता के पीछे अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री उमेश कुमार कश्यप के नेतृत्व में पूरी टीम का सराहनीय प्रयास रहा। इंस्पेक्टर पारस पटेल (थाना प्रभारी मुलमुला), साइबर टीम के सउनि विवेक सिंह, और चौकी नैला के उप निरीक्षक विनोद जाटवर समेत पूरी टीम ने दिन-रात एक कर इस मामले को सुलझाया। जांजगीर-चांपा पुलिस की इस कार्रवाई ने न सिर्फ एक बड़े अपराध का खुलासा किया है, बल्कि आम जनता में सुरक्षा का विश्वास भी बढ़ाया है।



