
सरकारी नौकरी का सपना देखने वाले युवाओं और मेडिकल डिग्री के चाहवानों को चूना लगाने वाले एक बड़े गिरोह का रायपुर पुलिस ने पर्दाफाश किया है। सिविल लाइन थाना पुलिस ने इस मामले में एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए दिल्ली से आरोपिया साक्षी सिंह को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह अब तक मासूम लोगों से ₹2,34,00,000 (2 करोड़ 34 लाख) की भारी-भरकम राशि डकार चुका है।
कैसे बुना गया धोखाधड़ी का जाल?
मामले का खुलासा तब हुआ जब प्रार्थी संजय निराला ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि भुनेश्वर बंजारे नरेश मनहर हीरा दिवाकर,राकेश रात्रे ने पोस्ट ऑफिस में विभिन्न पदों पर नौकरी लगाने और फर्जी सर्टिफिकेट दिलाने के नाम पर करोड़ों रुपये वसूले हैं। पुलिस ने जब जांच की परतें खोलीं, तो पता चला कि यह जाल बहुत गहरा बिछा था।
दिल्ली से जुड़ी कड़ी: फर्जी डिग्री की फैक्ट्री
पुलिस ने पहले इस मामले में 4 आरोपियों को जेल भेजा था, लेकिन गिरोह के मुख्य सूत्रधारों तक पहुँचना बाकी था। पूछताछ में ‘साक्षी सिंह’ का नाम सामने आया, जो दिल्ली में छिपकर बैठी थी। रायपुर पुलिस की टीम ने दबिश देकर उसे धर दबोचा।
साक्षी का काम: * वह पुणे की ‘डी. वाई पाटिल विद्यापीठ यूनिवर्सिटी’ के नाम पर एमबीबीएस (MBBS) और बीएएमएस (BAMS) की फर्जी डिग्रियां तैयार करती थी।
- उसके पास से 3 मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं, जिनमें जालसाजी के कई अहम सुराग मिले हैं।
इन धाराओं में फंसा शिकंजा
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सख्त धाराओं—318(4), 335, 336(2), 338(3), 340(1), 340(2), 3(5) और 111 के तहत कार्रवाई की है। यह कार्रवाई बताती है कि संगठित अपराध और जालसाजी पर रायपुर पुलिस बेहद सख्त है।
पाठकों के लिए विशेष अपील: सतर्क रहें, सुरक्षित रहें
रायपुर पुलिस और हमारी न्यूज़ टीम आपसे अपील करती है कि: - शॉर्टकट से बचें: सरकारी नौकरी केवल आधिकारिक चयन प्रक्रिया और परीक्षा के माध्यम से ही मिलती है। पैसे देकर नौकरी पाने का लालच आपको जेल या आर्थिक बर्बादी की ओर ले जा सकता है।
- सर्टिफिकेट की जांच: किसी भी शैक्षणिक डिग्री या प्रमाण पत्र को बनवाने के लिए अनाधिकृत व्यक्तियों के झांसे में न आएं। हमेशा मान्यता प्राप्त संस्थानों से ही शिक्षा लें।
- तुरंत सूचना दें: यदि कोई आपसे नौकरी के नाम पर पैसों की मांग करता है, तो तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन या साइबर सेल को सूचित करें।



