
क्या कोई गांव अपनी किस्मत खुद बदल सकता है? छत्तीसगढ़ के तखतपुर क्षेत्र के छतौना गांव ने इस बात को सच कर दिखाया है। कभी अवैध शराब, जुआ और सट्टे की गिरफ्त में रहे इस गांव ने आज एक ऐसी मिसाल कायम की है, जिसकी गूंज पूरे इलाके में है।
हाल ही में, ‘गौरी गोपाल गौसेवा धाम’ में आयोजित एक विशेष समारोह के दौरान गांव की इस प्रेरक कहानी को एक बड़ा सम्मान मिला। छतौना को नशामुक्त और अपराधमुक्त बनाने में उल्लेखनीय कार्य करने के लिए वहां की सरपंच राधिका कौशिक को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) रजनेश सिंह और कलेक्टर संजय अग्रवाल द्वारा सार्वजनिक रूप से सम्मानित किया गया।

कैसे बदली छतौना की तस्वीर?
यह बदलाव रातों-रात नहीं आया। इसके पीछे सरपंच राधिका कौशिक का दृढ़ नेतृत्व और एक व्यापक जनजागरण अभियान था। इस अभियान के तहत:
- अवैध गतिविधियों पर कड़ा प्रहार: लंबे समय से चल रही अवैध शराब की बिक्री, सट्टा और ताश-जुआ जैसी सामाजिक बुराइयों पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है।
- त्रिवेणी संगम (पंचायत, पुलिस और जनता): यह सफलता किसी एक की नहीं, बल्कि ग्राम पंचायत, पुलिस प्रशासन और स्थानीय ग्रामीणों के सामूहिक और अटूट प्रयासों का नतीजा है।
युवाओं को मिली नई दिशा
इस बदलाव का सबसे खूबसूरत असर गांव के युवाओं पर दिख रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि नशा और अपराध का साया हटने से गांव का माहौल बेहद सकारात्मक और अनुशासित हो गया है। अब यहां के युवाओं का रुझान गलत रास्तों से हटकर शिक्षा, खेल और सामाजिक गतिविधियों की ओर तेजी से बढ़ रहा है।
“यह तो बस शुरुआत है…”
सम्मान पाकर गर्वित सरपंच राधिका कौशिक ने इस ऐतिहासिक सफलता का पूरा श्रेय गांव के जागरूक नागरिकों, महिला समूहों, युवाओं और पुलिस प्रशासन के सहयोग को दिया। उन्होंने संकल्प लेते हुए कहा कि गांव को हमेशा नशामुक्त और सुरक्षित बनाए रखने के लिए यह जनजागरण अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) ने भी सरपंच और ग्रामीणों की पीठ थपथपाते हुए कहा कि छतौना ने सामाजिक सुधार के क्षेत्र में एक ऐसा प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया है, जिससे राज्य के दूसरे गांवों को भी सीख लेनी चाहिए।



