सुकमा में दिखा अनोखा नजारा: वर्दी वाले एसपी अचानक पहुंचे छात्रावास, मोमबत्ती जलाकर बच्चों को पढ़ाया विज्ञान का पाठ

सुकमा: रात के आठ बज रहे थे। दोरनापाल के प्री और पोस्ट मैट्रिक बालक छात्रावास में छात्र अपनी किताबों में तल्लीन थे। तभी वहां एक ऐसा मेहमान आ गया जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। कानून-व्यवस्था की कठिन जिम्मेदारियों को संभालने वाले सुकमा के पुलिस अधीक्षक (IPS) मयंक गुर्जर अचानक औचक निरीक्षण पर छात्रावास पहुंच गए।

एक आईपीएस अधिकारी को अपने बीच पाकर पहले तो बच्चे थोड़े असहज हुए, लेकिन एसपी मयंक गुर्जर के बेहद सहज और आत्मीय स्वभाव ने पलभर में माहौल बदल दिया। कुछ ही देर में छात्रावास का कमरा किसी आधुनिक कोचिंग क्लास जैसा लग रहा था, जहां जिले के एसपी एक सख्त अधिकारी के रूप में नहीं, बल्कि बच्चों का भविष्य संवारने वाले एक समर्पित शिक्षक के रूप में नजर आए।

जब शिक्षक बन गए एसपी: मोमबत्ती जलाकर समझाया विज्ञान
निरीक्षण के दौरान छात्रावास के कमरों में बच्चों को पढ़ाई करते देख एसपी मयंक गुर्जर का उत्साह भी बढ़ गया। उन्होंने देखा कि कुछ छात्र विज्ञान विषय की पढ़ाई कर रहे हैं। बच्चों की लगन देखकर उन्होंने खुद शिक्षक की कमान संभाल ली।
विषय को केवल रटने के बजाय व्यावहारिक रूप से समझाने के लिए उन्होंने एक मोमबत्ती जलाई और प्रयोग के माध्यम से विज्ञान का एक महत्वपूर्ण पाठ बच्चों को आसान भाषा में समझाया। बच्चों ने इसे किताबी ज्ञान के बजाय अपनी आँखों के सामने होते देखा तो उनकी जिज्ञासा और बढ़ गई।
सवाल-जवाब से परखी समझ, बढ़ाया आत्मविश्वास
प्रयोग समझाने के बाद एसपी मयंक गुर्जर ने बच्चों से पढ़ाए गए विषय से जुड़े सवाल भी पूछे। बच्चों ने भी पूरे उत्साह और ऊर्जा के साथ सही जवाब दिए। इस अनूठी शिक्षण शैली ने बच्चों में गजब का आत्मविश्वास भर दिया। एसपी ने उनकी इस सक्रियता की सराहना करते हुए उन्हें भविष्य में भी इसी लगन और मेहनत के साथ पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रेरित किया।
जमीन पर बैठकर बच्चों के साथ खाया रात्रि भोजन
निरीक्षण का सिलसिला सिर्फ पढ़ाई तक ही सीमित नहीं रहा। जब रात्रि भोजन का समय हुआ, तो एसपी मयंक गुर्जर ने किसी भी प्रकार की वीआईपी औपचारिकता से दूरी बनाते हुए सीधे बच्चों के बीच जमीन पर आसन लगाया और उनके साथ ही भोजन किया।
अधिकारियों को देखकर आम तौर पर बच्चे संकोच में आ जाते हैं, लेकिन एसपी के इस अपनेपन ने झिझक की हर दीवार को गिरा दिया। भोजन के दौरान उन्होंने बच्चों से बड़े ही दोस्ताना अंदाज में बातचीत की।
शिक्षा, अनुशासन और सुनियोजित भविष्य का संदेश
बच्चों के साथ भोजन करते हुए एसपी मयंक गुर्जर ने उन्हें जीवन के सबसे बड़े मंत्र दिए। उन्होंने संवाद करते हुए समझाया:
- नियमित पढ़ाई: जीवन में आगे बढ़ने का एकमात्र शॉर्टकट कड़ी मेहनत और नियमित पढ़ाई है।
- अनुशासन: सफलता हासिल करने के लिए दिनचर्या में अनुशासन का होना बेहद जरूरी है।
- समय का सदुपयोग: समय किसी के लिए नहीं रुकता, इसलिए हर पल का सही इस्तेमाल करें और अपने लक्ष्य के प्रति पूरी तरह समर्पित रहें।
सुकमा के नौनिहालों के लिए यादगार पल
सुकमा जैसे आदिवासी बहुल और चुनौतीपूर्ण जिले में ये छात्रावास इन बच्चों के सपनों को उड़ान देने की पहली सीढ़ी हैं। ऐसे में जिले के कप्तान का इस तरह खुद पहुंचकर बच्चों की सुधि लेना, मोमबत्ती जलाकर विज्ञान के प्रयोग समझाना और उनके साथ जमीन पर बैठकर भोजन करना, इन मासूमों के लिए किसी सुनहरे सपने से कम नहीं था।
यह दौरा महज एक रूटीन इंस्पेक्शन बनकर नहीं रह गया, बल्कि सुकमा के इन होनहारों के दिलों में आगे बढ़ने की एक ऐसी अलख जगा गया, जो उनके उज्ज्वल भविष्य का मार्ग जरूर प्रशस्त करेगी।



