“जब उस कुर्सी पर थे ही नहीं, तो जुर्माना क्यों? छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, 25 हजार का दंड रद्द!”

सूचना के अधिकार (RTI) कानून के तहत काम करने वाले अधिकारियों और आम जनता के लिए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण और राहत भरी व्यवस्था दी है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई अधिकारी आरटीआई आवेदन दाखिल होने के समय संबंधित विभाग या पद पर तैनात ही नहीं था, तो जानकारी देने में हुई देरी के लिए उसे जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। इसके साथ ही कोर्ट ने राज्य सूचना आयोग द्वारा दो तहसीलदारों पर लगाए गए 25,000 रुपये के जुर्माने को पूरी तरह से खारिज कर दिया है।
क्या था पूरा मामला?
यह पूरा कानूनी विवाद छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के समक्ष श्रीमती हेमलता डहरिया व अन्य की याचिका (WPC No. 3306 of 2021) के जरिए आया था। मामले में राज्य सूचना आयोग ने आरटीआई के तहत समय पर जानकारी उपलब्ध न कराने के कारण संबंधित अधिकारियों पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना ठोक दिया था।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत को बताया गया कि जिस समय आरटीआई आवेदन दिया गया था या प्रथम अपील की गई थी, उस अवधि में वे उस विशेष कार्यालय या विभाग में पदस्थ ही नहीं थे। जब उनका उस दफ्तर से कोई लेना-देना ही नहीं था, तो उनसे यह उम्मीद कैसे की जा सकती है कि वे तय समयसीमा के भीतर दस्तावेज उपलब्ध कराते।
हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी
मामले की सुनवाई करते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कानून के एक बुनियादी सिद्धांत को रेखांकित किया। अदालत ने कहा कि किसी भी लोक सेवक या अधिकारी पर तभी व्यक्तिगत जिम्मेदारी या शास्ति (penalty) लगाई जा सकती है, जब उसकी ओर से स्पष्ट रूप से कर्तव्य में लापरवाही या कोताही बरती गई हो।
जो अधिकारी घटना या आवेदन के समय उस कुर्सी पर बैठा ही नहीं था, उसे उस देरी के लिए कसूरवार ठहराना कानूनी रूप से सही नहीं है। अदालत ने इन्हीं ठोस तर्कों के आधार पर राज्य सूचना आयोग के आदेश को गैरकानूनी मानते हुए रद्द कर दिया।
इस फैसले के मायने
कानूनी जानकारों का मानना है कि हाईकोर्ट के इस फैसले से उन सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को बड़ी राहत मिली है, जिन्हें कई बार प्रशासनिक फेरबदल या ट्रांसफर के बाद भी पिछले मामलों में नोटिस थमा दिए जाते थे। साथ ही, यह फैसला यह भी सुनिश्चित करता है कि न्याय की प्रक्रिया में केवल वास्तविक दोषी व्यक्ति पर ही जिम्मेदारी तय होनी चाहिए, न कि किसी ऐसे व्यक्ति पर जिसका उस समय उस पद से कोई सरोकार ही नहीं था।




