
छत्तीसगढ़ में इन दिनों मौसम भले ही सुहाना हो, लेकिन बिजली के बिलों ने आम जनता के पसीने छुड़ा दिए हैं। राजधानी रायपुर से लेकर कबीरधाम, दुर्ग और बिलासपुर तक, गलियों और चौराहों पर केवल एक ही चर्चा है—’स्मार्ट मीटर’। उपभोक्ता परेशान हैं, सड़कों पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं और लोग गुस्से में अपने घरों से मीटर उखाड़कर बिजली दफ्तरों में जमा करा रहे हैं।
सवाल यह उठ रहा है कि क्या वाकई स्मार्ट मीटर सिर्फ खपत दर्ज कर रहे हैं, या यह मध्यमवर्गीय और नौकरीपेशा परिवारों के बजट पर एक सीधा डाका है?
रायपुर में बंद फ्लैट का बिल 47 हजार: लापरवाही की इंतहा!
स्मार्ट मीटर की विश्वसनीयता पर सबसे बड़ा सवाल राजधानी रायपुर से ही सामने आया है। भावना नगर के एक बंद पड़े फ्लैट का मामला बिजली कंपनी के दावों की हवा निकालने के लिए काफी है।
रायपुर निवासी मनीष शर्मा ने भावना नगर में एक फ्लैट लिया, जिसमें न कोई पंखा चला और न ही कोई बल्ब जला। फ्लैट पूरी तरह बंद था, लेकिन मई महीने में बिजली कंपनी ने इसका बिल 15,500 रुपये भेज दिया। हैरानी तब और बढ़ गई जब जून में यह बिल सीधे 32,000 रुपये पहुंच गया!
दो महीने में एक बंद फ्लैट का कुल बिल 47,500 रुपये! मनीष शर्मा बिजली दफ्तरों के चक्कर काटते रहे, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। जब मामला मीडिया की सुर्खियों में आया, तो अफसरों ने आनन-फानन में तकनीकी सुधार का हवाला देते हुए बिल को महज 26 रुपये कर दिया। अब सवाल यह है कि अगर उपभोक्ता चुप बैठ जाता, तो क्या उससे यह हजारों रुपये जबरन वसूल लिए जाते?
पूरे प्रदेश में सुलग रहा है आक्रोश
रायपुर के बंद फ्लैट का यह अकेला मामला नहीं है। पूरे प्रदेश में स्मार्ट मीटर लगने के बाद लोगों के बिल अचानक दोगुने से तीन गुने तक बढ़ गए हैं:
- फोरम तक पहुंची शिकायत: रायपुर के राजीव नगर के एक उपभोक्ता ने बिना स्पष्ट सहमति के मीटर बदले जाने और बिल में भारी अंतर आने पर उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम (CGRF) का दरवाजा खटखटाया है।
- कबीरधाम में मीटर उखाड़कर दफ्तर पहुंचे लोग: पांडातराई क्षेत्र में आक्रोशित लोगों ने अपने घरों से स्मार्ट मीटर उखाड़े और सीधे बिजली विभाग के दफ्तर में जमा कर दिए।
- सड़कों पर राजनीतिक घमासान: दुर्ग और बिलासपुर समेत कई जिलों में कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर आक्रामक है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार यह सब महतारी वंदन योजना के पैसों की रिकवरी करने के लिए कर रही है।
अफसरों के दावे बनाम एक्सपर्ट की सलाह
एक तरफ जहां छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी (CSPDCL) का दावा है कि स्मार्ट मीटर आने के बाद कुल खपत में करीब 28% की कमी आई है और मीटर सिर्फ वास्तविक खपत दिखा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ एक्सपर्ट्स और रिटायर्ड अफसरों का मानना कुछ और ही है।
बिजली कंपनी के रिटायर्ड अधिकारी पीएन सिंह का कहना है कि स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता बेहद जरूरी है। टेंडर किसी एक विशेष कंपनी के बजाय ओपन मार्केट में होना चाहिए ताकि गड़बड़ियों पर नियंत्रण रखा जा सके। इसके साथ ही, संसद में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री द्वारा दिए गए बयान के अनुसार स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाना पूरी तरह वैकल्पिक है; इसे उपभोक्ताओं पर जबरन थोपना नियमों के खिलाफ है।
अब आगे क्या?
जब घर बंद होने के बावजूद हजारों रुपये के बिल थमा दिए जाएं, तो बिजली कंपनी की कार्यप्रणाली पर जनता का विश्वास डिगना स्वाभाविक है। रायपुर से उठी यह विरोध की चिंगारी अब पूरे राज्य में फैल चुकी है।
बिजली विभाग को केवल आंकड़े पेश करने के बजाय जमीनी स्तर पर आकर उपभोक्ताओं की समस्याओं का समाधान करना होगा, क्योंकि जब बात आम आदमी के बजट और हक की हो, तो आक्रोश का शांत होना आसान नहीं होता।



