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रेलवे ठेकेदारों के लिए बड़ी चेतावनी: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने ₹41 लाख का दावा किया खारिज, जानिए क्या है पूरा मामला

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने रेलवे ठेकेदारों, इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों और आपूर्तिकर्ताओं (Suppliers) के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और कड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी अनुबंधों (Government Contracts) में नियमों की अनदेखी या जरूरी दस्तावेजों की कमी भारी पड़ सकती है।

हाईकोर्ट ने दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) के पक्ष में फैसला सुनाते हुए एक ठेकेदार के ₹41.63 लाख के मौद्रिक दावे को खारिज कर दिया है। आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला और इससे ठेकेदारों को क्या बड़ा सबक मिलता है।

क्या है पूरा मामला?

यह पूरा विवाद मेसर्स तेजा इलेक्ट्रिकल्स (मालिक राजेश तेजवानी) और दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) के बीच का है। ठेकेदार ने रेलवे विद्युतीकरण (Railway Electrification) कार्य के लिए गैल्वनाइज्ड स्टील के खंभे (Poles) सप्लाई किए थे।

ठेकेदार ने रेलवे से लगभग 41.63 लाख रुपये की बकाया राशि वसूलने के लिए दावा किया था। हालांकि, मध्यस्थता (Arbitration) और वाणिज्यिक न्यायालय (Commercial Court) पहले ही इस दावे को खारिज कर चुके थे। इसके खिलाफ ठेकेदार ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में अपील (ARBA No. 91 of 2017) दायर की थी, जिसे अब अदालत ने भी खारिज कर दिया है।

हाईकोर्ट ने फैसले में क्या खास बातें कहीं?

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की खंडपीठ (न्यायमूर्ति पार्थ प्रतीम साहू और न्यायमूर्ति सुषमा सावंत) ने सुनवाई के दौरान कुछ अहम और कड़े बिंदु स्पष्ट किए:

  • अनुमोदित स्रोतों से ही खरीद जरूरी: ठेकेदार यह साबित करने में पूरी तरह विफल रहा कि सप्लाई किए गए खंभे आरडीएसओ/कोर (RDSO/CORE) द्वारा अनुमोदित (Approved) स्रोतों से ही खरीदे गए थे।
  • सिर्फ टेस्ट सर्टिफिकेट काफी नहीं: अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल गैल्वनाइजिंग परीक्षण प्रमाण पत्र या निरीक्षण प्रमाण पत्र दिखा देना इस बात का सबूत नहीं है कि सामग्री सही और अधिकृत जगह से ही बनाई गई है।
  • 85% भुगतान का मतलब पूर्ण अनुपालन नहीं: यदि रेलवे ने काम का 85% हिस्सा अंतरिम या अग्रिम भुगतान के रूप में जारी भी कर दिया है, तो इसका यह अर्थ नहीं निकाला जा सकता कि सभी संविदात्मक शर्तें पूरी हो गई हैं। यदि अंतिम शर्तें पूरी नहीं होती हैं, तो रेलवे को शेष राशि रोकने का पूरा अधिकार है।
  • कानूनी दायित्व हैं संविदा की शर्तें: सामग्री की खरीद और निरीक्षण से जुड़ी शर्तें महज कागजी औपचारिकताएं नहीं हैं, बल्कि यह एक ठोस और अनिवार्य दायित्व हैं।

ठेकेदारों और कंपनियों के लिए बड़ा सबक

यह फैसला उन सभी कारोबारियों के लिए एक बड़ी सीख है जो सरकारी विभागों या सार्वजनिक उपक्रमों के साथ काम करते हैं। अदालत ने रेखांकित किया है कि अनुबंध के निष्पादन के दौरान निम्नलिखित दस्तावेजों को हमेशा सुरक्षित रखना चाहिए:

  • मूल खरीद दस्तावेज (Original Purchase Documents)
  • निर्माता के परीक्षण प्रमाण पत्र (Manufacturer Test Certificates)
  • आपूर्तिकर्ता के चालान (Supplier Invoices)
  • निरीक्षण अभिलेख (Inspection Records)

अदालत का अंतिम फैसला

हाईकोर्ट ने यह भी माना कि धारा 37 के तहत अदालत को किसी मध्यस्थता पंचाट (Arbitral Award) के गुण-दोष पर दोबारा से व्यापक सुनवाई करने का असीमित अधिकार नहीं है, जब तक कि फैसले में कोई विकृति या स्पष्ट अवैधता न हो।

चूंकि मध्यस्थ के निष्कर्ष न तो मनमाने थे और न ही कानून के विरुद्ध, इसलिए हाईकोर्ट ने मध्यस्थता अपील संख्या 91/2017 को खारिज कर दिया और वाणिज्यिक न्यायालय के आदेश को पूरी तरह बरकरार रखा।

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