
दुर्ग/रायपुर: संयुक्त पुलिस कर्मचारी एवं परिवार कल्याण संघ के अध्यक्ष उज्ज्वल दीवान ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री और गृह मंत्री को पत्र लिखकर एक अनूठा और चौंकाने वाला प्रस्ताव दिया है। उन्होंने सूरजपुर जिले के बहुचर्चित पुलिस परिवार हत्याकांड में मौत की सजा पाने वाले दोषियों की सजा के क्रियान्वयन के लिए निःशुल्क जल्लाद के रूप में अपनी सेवाएं देने की इच्छा जताई है।

प्रमुख बिंदु:
- मामला क्या है?: सूरजपुर न्यायालय द्वारा पुलिस परिवार के सदस्यों की हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए कुलदीप साहू, चंद्रकांत चौधरी और फूल सिंह उर्फ रिंकू विश्वकर्मा को मृत्युदंड (फांसी की सजा) सुनाई जा चुकी है।
- क्या है मांग?: संघ के अध्यक्ष उज्ज्वल दीवान ने पुलिस परिवार के प्रति संवेदना और न्याय की भावना व्यक्त करते हुए पत्र में लिखा है कि यदि कानून और शासन अनुमति दे, तो वे बिना किसी पारिश्रमिक के इन दोषियों को फांसी देने के लिए जल्लाद की भूमिका निभाने को तैयार हैं।ताकी फाँसी की प्रक्रिया जल्द हो।
क्या वाकई ऐसा संभव है? (कानूनी और व्यावहारिक पक्ष):
- जल्लाद की नियुक्ति की प्रक्रिया: भारत में जेलों में फांसी देने के लिए आधिकारिक तौर पर जेल प्रशासन द्वारा जल्लाद नियुक्त किए जाते हैं (या पंजीकृत निजी जल्लादों/अन्य कैदियों की मदद ली जाती है)।
- कानूनी अनुमति: भारतीय जेल नियमावली और न्यायपालिका की प्रक्रिया के तहत कोई भी आम नागरिक या संगठन स्वेच्छा से सीधे जल्लाद की भूमिका नहीं निभा सकता, जब तक कि प्रशासन द्वारा विशेष अनुमति या आधिकारिक प्रक्रिया के तहत ऐसा प्रावधान न किया जाए।
- नैतिक और प्रतीकात्मक पहलू: हालांकि यह पत्र कानूनी रूप से व्यावहारिक नहीं माना जा सकता, लेकिन इसके जरिए संघ और अध्यक्ष ने पुलिस परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना, नाराजगी और न्याय की मांग को एक प्रतीकात्मक और कड़े तरीके से सरकार के सामने उठाया है।




