रिटायरमेंट से 1 साल पहले कर्मचारियों को मिलेगी गृह जिले में पोस्टिंग, हाइकोर्ट से आबकारी हेड कांस्टेबल को मिली राहत..

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य के सरकारी कर्मचारियों के हित में एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि सेवानिवृत्ति (रिटायरमेंट) से एक वर्ष पहले कर्मचारियों को उनके गृह जिले (Home District) में पोस्टिंग पाने का अधिकार है। राज्य सरकार की तकनीकी दलीलों को खारिज करते हुए कोर्ट ने आबकारी विभाग के एक हेड कांस्टेबल के पक्ष में आदेश जारी कर उन्हें 15 दिनों के भीतर उनके गृह जिले बिलासपुर में पदस्थ करने के निर्देश दिए हैं।
क्या है पूरा मामला?
याचिकाकर्ता नेल्सन लवेट वर्तमान में रायगढ़ जिले में आबकारी हेड कांस्टेबल के पद पर पदस्थ हैं और जुलाई 2027 में सेवानिवृत्त होने वाले हैं। लवेट की नियुक्ति 19 अप्रैल 1993 को आबकारी विभाग में सेल्समैन के रूप में हुई थी, जिसके बाद उन्हें नियमित कर आरक्षक बनाया गया।
वर्ष 2014 में कोरबा से बिलासपुर स्थानांतरण के बाद, 24 जून 2022 को उन्हें बिलासपुर से रायगढ़ ट्रांसफर कर दिया गया। वर्ष 2023 में पदोन्नति के बाद भी वे रायगढ़ में ही कार्यरत रहे।
पत्नी की बीमारी और गृह जिले में पोस्टिंग की मांग
नेल्सन लवेट ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर तबादला नीति 2025 के क्लॉज 3.12 का लाभ देने की मांग की थी। उन्होंने कोर्ट को बताया कि रिटायरमेंट में कम समय बचा है और उनकी पत्नी का स्वास्थ्य लगातार खराब चल रहा है, जिसका इलाज जारी है। उन्होंने अपने गृह जिले बिलासपुर में पोस्टिंग के लिए विभाग को कई बार अभ्यावेदन (Representation) सौंपा, लेकिन विभाग की ओर से कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया।
सरकार की दलीलें कोर्ट में खारिज
मामले की सुनवाई जस्टिस बिभू दत्ता गुरु की एकल पीठ में हुई। राज्य सरकार की ओर से तर्क दिया गया कि 5 जून 2025 की ट्रांसफर पॉलिसी आबकारी, पुलिस, परिवहन, वाणिज्यिक कर और शिक्षा जैसे विभागों पर लागू नहीं होती। सरकार ने यह भी कहा कि किसी भी कर्मचारी को उसकी पसंद की पोस्टिंग का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।
हालांकि, हाईकोर्ट ने सरकार की इन दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया।
हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी और आदेश
अदालत ने कहा कि जब राज्य सरकार के अन्य विभिन्न विभागों के कर्मचारियों को रिटायरमेंट से पहले उनकी पसंद या गृह जिले में पोस्टिंग का लाभ दिया जाता रहा है, तो याचिकाकर्ता को इससे वंचित नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने सक्षम अधिकारी को सख्त निर्देश जारी करते हुए कहा:
- आदेश की प्रति मिलने के 15 दिनों के भीतर याचिकाकर्ता को उनके गृह जिले बिलासपुर में पोस्टिंग देने का आवश्यक आदेश जारी किया जाए।
- याचिकाकर्ता के अभ्यावेदन पर संवेदनशीलता के साथ विचार किया जाए।
कर्मचारियों के लिए क्यों अहम है यह फैसला?
यह फैसला राज्य सरकार के उन तमाम कर्मचारियों के लिए एक मिसाल बनेगा जो अपने सेवा काल के अंतिम दिनों में गृह जिले में पोस्टिंग के लिए विभागीय अड़चनों का सामना करते हैं। कोर्ट के इस रुख से स्पष्ट है कि प्रशासनिक नीतियों की आड़ में कर्मचारियों के मानवीय और कल्याणकारी अधिकारों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।




