अजब-गजबअपराधजागरूकतापर्यावरणप्रशासनवन्यजीव सुरक्षासारंगढ़- बिलाईगढ़

आस्था की आड़ में ‘कब्जा’ नाकाम: गोमर्डा अभयारण्य में वन विभाग का बड़ा एक्शन, अतिक्रमणकारियों के मंसूबों पर फिरा पानी(वीडियो)

सारंगढ़-बिलाईगढ़। छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध गोमर्डा अभयारण्य की बेशकीमती वन भूमि को हथियाने की एक बड़ी साजिश को वन विभाग ने नाकाम कर दिया है। ‘आस्था’ का सहारा लेकर जंगल की जमीन पर पैर पसारने की कोशिश कर रहे अतिक्रमणकारियों के खिलाफ विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए अवैध निर्माणों को ढहा दिया है।
भक्ति का चोला, जमीन पर कब्जा!
ताजा जानकारी के अनुसार, गोमर्डा अभयारण्य के भीतर कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा धार्मिक संरचनाओं के निर्माण की आड़ में सरकारी जमीन को घेरने का प्रयास किया जा रहा था। अतिक्रमणकारियों को लगा कि धर्म और आस्था का मामला होने के कारण प्रशासन हाथ डालने से कतराएगा, लेकिन वन विभाग की मुस्तैदी ने उनके इन मंसूबों को ध्वस्त कर दिया।
विभाग की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’
सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम ने योजनाबद्ध तरीके से मौके पर धावा बोला। इस दौरान अतिक्रमणकारियों द्वारा किए गए अस्थायी निर्माण और घेराबंदी को पूरी तरह हटा दिया गया। कार्रवाई के दौरान विभाग ने स्पष्ट संदेश दिया कि अभयारण्य की सीमा के भीतर किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि या अतिक्रमण को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
वन्यजीवों के अस्तित्व पर था खतरा
गोमर्डा अभयारण्य न केवल पेड़ों का समूह है, बल्कि यह कई दुर्लभ वन्यजीवों का सुरक्षित ठिकाना भी है। मानवीय हस्तक्षेप और अवैध निर्माणों के कारण वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास (Habitat) को नुकसान पहुँच रहा था। वन अधिकारियों के अनुसार, जंगल के भीतर इस तरह की गतिविधियाँ पर्यावरण संतुलन के लिए बड़ा खतरा हैं।
चेतावनी: अब होगी कड़ी कानूनी कार्रवाई
वन विभाग ने इस मामले में संलिप्त लोगों को चिन्हित कर लिया है। अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में यदि फिर से ऐसी कोशिश की गई, तो संबंधितों के खिलाफ वन अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे किसी के बहकावे में आकर जंगल की जमीन पर अतिक्रमण न करें।
खबर की खास बातें:

  • स्थान: गोमर्डा अभयारण्य (सारंगढ़-बिलाईगढ़)।
  • वजह: आस्था के नाम पर वन भूमि पर अवैध कब्जा।
  • कार्यवाही: वन विभाग ने मौके पर पहुँचकर अतिक्रमण हटाया।
  • मकसद: वन्यजीवों के संरक्षण और जंगल की सुरक्षा।
Join Dainik Bodh Whatsapp Community

Related Articles

Back to top button