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छत्तीसगढ़ की प्रशासनिक गलियारों में सोमवार (17 नवंबर 2025) को उस वक्त हड़कंप मच गया जब राज्य के महाधिवक्ता (Advocate General) प्रफुल्ल एन. भरत ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने सोमवार को राजभवन पहुंचकर राज्यपाल रामेन डेका को अपना त्यागपत्र सौंपा।
🚨 राजभवन की चुप्पी ने बढ़ाई हलचल
सबसे बड़ी बात यह है कि इस्तीफे के 24 घंटे बाद भी, राजभवन या गवर्नर ऑफिस की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। न तो इस्तीफे की स्वीकृति की पुष्टि हुई है और न ही इस अचानक कदम के पीछे के कारणों का खुलासा किया गया है। राजभवन की यह चुप्पी प्रदेश के प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में अटकलों का बाज़ार गर्म कर रही है।
🧐 कौन हैं प्रफुल्ल एन. भरत?
प्रफुल्ल एन. भरत प्रदेश के सबसे अनुभवी और वरिष्ठ विधि विशेषज्ञों में गिने जाते हैं। उन्हें पिछली बार जनवरी 2024 में महाधिवक्ता नियुक्त किया गया था। इससे पहले, वह 2014 से 2018 के बीच रमन सिंह सरकार में भी अतिरिक्त महाधिवक्ता के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं। कानूनी मामलों में उनकी गहरी पकड़ उन्हें राज्य के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी चेहरा बनाती है।
❓ क्यों दिया अचानक इस्तीफा?
सूत्रों के हवाले से खबरें हैं कि यह अचानक इस्तीफा कई सवाल खड़े कर रहा है। क्या यह कोई निजी फैसला है, या इसके पीछे कोई प्रशासनिक दबाव है?
- फिलहाल, इस्तीफे का वास्तविक कारण स्पष्ट नहीं है।
- सूत्रों के मुताबिक, यह मामला अब उच्च-स्तरीय बैठकों का केंद्र बन गया है, और कानूनी विशेषज्ञों से सलाह ली जा रही है।
- उनके अचानक पद छोड़ने से, राज्य सरकार के सामने कानूनी मोर्चे पर एक अस्थायी शून्य पैदा हो गया है।
छत्तीसगढ़ की राजनीति और प्रशासन से जुड़ी इस महत्वपूर्ण घटना पर हमारी नज़र बनी हुई है। जैसे ही राजभवन से कोई आधिकारिक पुष्टि या इस्तीफे के कारणों का खुलासा होता है, हम आपको तुरंत अपडेट करेंगे।




