
धनतेरस पर चेकिंग के नाम पर ‘वर्दी में चोरी’: रायपुर क्राइम ब्रांच के 5 जवान ₹2 लाख चुराने के आरोप में निलंबित
दुर्ग के कारोबारी ने लगाया आरोप, SSP ने तत्काल लिया एक्शन; क्या पुलिस ही करेगी जनता को ‘लूट’ का डर?
रायपुर/दुर्ग:
‘खाकी’ पर लगा एक ऐसा दाग, जिसने धनतेरस जैसे पावन पर्व पर ही पुलिस की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। चेकिंग के बहाने एक कारोबारी की कार से 2 लाख रुपए चुराने के सनसनीखेज आरोप में रायपुर पुलिस ने बड़ा एक्शन लिया है। रायपुर के SSP ने त्वरित कार्रवाई करते हुए क्राइम ब्रांच में पदस्थ 1आरक्षक को निलंबित कर दिया है।
जिन पुलिसकर्मियों पर वर्दी की आड़ में चोरी का आरोप लगा है और जिन्हें निलंबित व जांच किया जा रहा है, उनमें आरक्षक प्रशांत शुक्ला, धनंजय गोस्वामी, प्रमोद वट्टी, अमित करिया और वीरेंद्र भार्गव शामिल हैं।
जानिए क्या है पूरा मामला, जिसने पुलिस महकमे को हिला दिया:
पूरा मामला दुर्ग और रायपुर से जुड़ा है। धमतरी में बाइक शो-रूम चलाने वाले कारोबारी मयंक गोस्वामी ने दुर्ग SSP विजय अग्रवाल से लिखित शिकायत की थी।
कारोबारी ने बताया कि वह धनतेरस के दिन अपनी कार से धमतरी से दुर्ग स्थित अपने घर लौट रहे थे। रास्ते में रायपुर क्राइम ब्रांच की टीम ने उन्हें चेकिंग के नाम पर रोका। मयंक गोस्वामी का सीधा आरोप है कि चेकिंग के दौरान उनकी कार में रखे 2 लाख रुपए गायब हो गए, जिसे पुलिसकर्मियों ने ही निकाला है।
इससे भी चौंकाने वाली बात यह है कि कारोबारी का कहना है कि पैसे निकालने के बाद भी पुलिसकर्मियों ने उनका पीछा नहीं छोड़ा और वे कार का पीछा करते हुए सीधे उनके घर दुर्ग तक भी पहुंचे थे।
तत्काल एक्शन और आगे की जांच:
मामले की गंभीरता को देखते हुए दुर्ग SSP विजय अग्रवाल ने तुरंत जांच रिपोर्ट बनाकर रायपुर SSP को भेज दी थी। आरोपों की गंभीरता और प्राथमिक जांच के आधार पर, रायपुर SSP ने फौरन एक्शन लेते हुए पांचों आरोपी आरक्षकों को निलंबित कर दिया है।
यह मामला दिखाता है कि जब रक्षक ही भक्षक बन जाए, तो आम जनता किस पर भरोसा करे। पुलिस महकमे में यह घटना जहां अधिकारियों के लिए शर्मिंदगी का विषय है, वहीं अब देखना यह है कि विभागीय जांच में इन निलंबित आरक्षकों के खिलाफ और क्या बड़ी कार्रवाई होती है।
क्या ऐसे मामलों से जनता का पुलिस पर से भरोसा उठ जाएगा? यह सवाल अब छत्तीसगढ़ की जनता के मन में है।




