
बिलासपुर
कानून-व्यवस्था संभालने और जनता की सुरक्षा में दिन-रात मुस्तैद रहने वाले पुलिसकर्मियों के लिए मानसिक स्वास्थ्य और तनाव प्रबंधन आज के समय की एक बड़ी जरूरत बन चुका है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए बिलासपुर पुलिस लाइन स्थित चेतना हॉल में रेंज स्तरीय रिफ्रेशर कोर्स के पंचम बैच के तहत एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय, बिलासपुर के टेलीफोन एक्सचेंज रोड स्थित मुख्य सेवाकेंद्र ‘राजयोग भवन’ की संचालिका बीके स्वाति दीदी ने शिरकत की। उन्होंने पुलिस अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों में संयम बनाए रखना ही एक अच्छे और प्रभावी पुलिसकर्मी की असली पहचान है।

क्रोध समस्या का समाधान नहीं, आत्म-संतुलन है असली शक्ति
कार्यशाला को संबोधित करते हुए बीके स्वाति दीदी ने बताया कि क्रोध किसी भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं होता है। जब व्यक्ति क्रोध की स्थिति में होता है, तो उसकी निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित हो जाती है, जिससे कई बार ऐसे कदम उठ जाते हैं जिनका बाद में पछतावा होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वास्तविक शक्ति दूसरों पर धौंस जमाने में नहीं, बल्कि चुनौतीपूर्ण माहौल में भी अपने मन और विचारों को संतुलित रखने में है।
पुलिस सेवा और मानसिक संतुलन
पुलिस विभाग में कार्य का भारी दबाव, लंबी ड्यूटी और कई बार तनावपूर्ण माहौल का सामना करना पड़ता है। इस पर चर्चा करते हुए बीके दीदी ने कहा कि पुलिस सेवा में ऐसे कई पल आते हैं जब धैर्य और त्वरित निर्णय की परीक्षा होती है।
- अत्यधिक कार्यभार, थकान या बाहरी दबाव के कारण क्रोध आना स्वाभाविक हो सकता है, लेकिन इन कारणों को पहचानकर खुद को संभालना जरूरी है।
- किसी भी परिस्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय कुछ पल रुककर शांत मन से विचार करना क्रोध प्रबंधन का सबसे बेहतरीन तरीका है।
सकारात्मक संवाद और आत्मचिंतन से बदलेगी कार्यशैली
बीके स्वाति दीदी ने अधिकारियों को प्रेरित करते हुए कहा कि मैदान में उतरने या किसी मामले को सुलझाने से पहले खुद से यह सवाल जरूर करें कि आपके शब्द और तेवर मामले को शांत करेंगे या उसे और बढ़ाएंगे।
- सहकर्मियों और आम जनता के प्रति सम्मान, धैर्यपूर्वक बात सुनना और सकारात्मक संवाद तनाव को कम करने में अचूक हथियार साबित होते हैं।
- नियमित रूप से आत्मचिंतन करने, कुछ समय खुद को देने और सकारात्मक संकल्पों से जुड़ने से आंतरिक शक्ति बढ़ती है।
- सच्चा आत्मानुशासन वही है जो विपरीत से विपरीत परिस्थिति में भी व्यक्ति के व्यवहार की गरिमा को गिरने न दे। एक पुलिस अधिकारी का संयमित और संतुलित व्यवहार न केवल विभाग का मान बढ़ाता है, बल्कि जनता के साथ भरोसे का रिश्ता भी मजबूत करता है।
सफल आयोजन के प्रमुख बिंदु
यह महत्वपूर्ण तीन दिवसीय रिफ्रेशर कोर्स पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) भ्राता रामगोपाल गर्ग, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) भ्राता रजनीश सिंह एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मधुलिका सिंह के मार्गदर्शन में संचालित किया जा रहा है।
इस प्रशिक्षण सत्र में बिलासपुर रेंज के आठ जिलों के पुलिस अधिकारी हिस्सा ले रहे हैं, जिनमें शामिल हैं:
- बिलासपुर
- रायगढ़
- कोरबा
- जांजगीर-चांपा
- मुंगेली
- गौरेला-पेंड्रा-मरवाही
- सारंगढ़-बिलाईगढ़
- सक्ती
इस पूरे कार्यक्रम को सफल बनाने में ब्रह्माकुमारीज बिलासपुर की बीके संतोषी दीदी और डॉ. कमल छाबड़ा का विशेष सहयोग रहा। इस तरह के जागरूकता कार्यक्रमों से पुलिस बल को मानसिक रूप से मजबूत और तनावमुक्त रहने में बड़ी मदद मिल रही है।




