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कोटा (बिलासपुर)BEO ऑफिस के लेखापाल और कर्मचारी ने मिलकर सरकारी खजाने में लगाई 30 लाख की सेंध :    (‘सैलरी स्कैम’)

न्यायधानी के शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने विभाग की साख पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) कार्यालय कोटा में पदस्थ एक लेखापाल और कर्मचारी ने मिलकर ‘अलाउंस’ (भत्ते) के नाम पर सरकारी खजाने से लगभग 30 लाख रुपये पार कर दिए। मामले का खुलासा तब हुआ जब खुद विकासखंड शिक्षा अधिकारी नरेंद्र मिश्रा ने इस वित्तीय हेराफेरी की लिखित शिकायत थाने में दर्ज कराई।
कैसे रचा गया गबन का ‘मास्टरप्लान’?
पुलिस में दर्ज रिपोर्ट के अनुसार, यह पूरा खेल सितंबर 2024 से शुरू होकर फरवरी 2025 तक चला। आरोपी लेखापाल नवल सिंह पैकरा और कार्यालय कर्मचारी देवेंद्र कुमार पालके ने डिजिटल सिस्टम की खामियों और भरोसे का फायदा उठाया। इन दोनों ने ‘Other Allowances’ (अन्य भत्ते) मद में कूटरचना (Forging) करते हुए अपने स्वयं के खातों में असमान रूप से वृद्धि कर ली।
मात्र 6 महीनों के भीतर, किश्तों में सरकारी राशि को अपने निजी खातों में ट्रांसफर कर इन्होंने शासन को करीब 30 लाख रुपये का चूना लगाया।
बीएनएस की गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज
कोटा पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अपराध क्रमांक 171/26 के तहत आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है:

  • धारा 316 (5) व 318 (4): विश्वासघात और धोखाधड़ी।
  • धारा 338, 340 (2) व 336 (3): दस्तावेजों की कूटरचना और जाली कागजातों का उपयोग।
  • धारा 3 (5): समूह में किए गए अपराध (साझा मंशा)।
    समीक्षा: क्या यह सिर्फ दो लोगों का खेल है?
    30 लाख रुपये का गबन कोई छोटी राशि नहीं है। शिक्षा विभाग के सॉफ्टवेयर और ऑडिटिंग सिस्टम पर यह एक बड़ा तमाचा है। सवाल यह उठता है कि क्या पिछले 6 महीनों से उच्च अधिकारियों ने ‘रिकॉन्सिलेशन’ (आय-व्यय का मिलान) नहीं किया था?
    गाज गिरना अभी बाकी: और कौन आ सकता है शिकंजे में?
    पुलिस सूत्रों की मानें तो यह जांच का दायरा केवल इन दो कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगा। आने वाले दिनों में इन पर भी कार्रवाई की तलवार लटक सकती है:
  • ट्रेजरी (कोषालय) के संबंधित बाबू: क्या ट्रेजरी से बिल पास करते समय इन ‘असामान्य’ भत्तों पर किसी ने ध्यान नहीं दिया?
  • सत्यापन अधिकारी (Verifying Officers): डिजिटल सिग्नेचर और बिल अप्रूवल की प्रक्रिया में शामिल अन्य कर्मचारी भी संदेह के घेरे में हैं।
  • बैंक प्रबंधन: क्या एक साथ इतनी बड़ी राशि भत्तों के रूप में खातों में आने पर बैंक ने कोई अलर्ट जारी नहीं किया?
  • पिछले ऑडिटर्स: अगर इस अवधि के दौरान कोई आंतरिक ऑडिट हुआ था, तो यह चोरी पकड़ी क्यों नहीं गई?

    कोटा पुलिस अब आरोपियों की गिरफ्तारी और गबन की गई राशि की रिकवरी के प्रयास में जुट गई है। इस खुलासे के बाद पूरे जिले के शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। देखना होगा कि जांच की आंच विभाग के और कितने ‘सफेदपोश’ चेहरों तक पहुँचती है।
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