
एक तरफ़ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ‘एक पेड़ मां के नाम’ जैसे अभियानों से वनों के संरक्षण का संदेश दे रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ़, इसी छत्तीसगढ़ के कांकेर ज़िले में एक औद्योगिक कंपनी इन कोशिशों पर पानी फेर रही है। ज़िले के आरी डोंगरी गाँव में गोदावरी इस्पात पर बिना अनुमति के लगभग 5000 पेड़ काटने का गंभीर आरोप है। वन विभाग ने खुद इसकी पुष्टि की है, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि इतने बड़े पर्यावरण अपराध के बाद भी कंपनी के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
यह मामला तब सामने आया जब स्थानीय लोगों ने भारी मात्रा में पेड़ों की अवैध कटाई देखी। उन्होंने इसकी शिकायत वन विभाग से की, जिसके बाद वन मंडल अधिकारी (पूर्व भानुप्रतापपुर) ने मौके पर जाकर जांच की। सूत्रों के मुताबिक, जांच रिपोर्ट में साफ़ तौर पर लिखा गया है कि गोदावरी इस्पात ने अपनी लीज सीमा से बाहर जाकर लगभग 5000 पेड़ काटे हैं। इस रिपोर्ट में कंपनी पर उचित कार्रवाई की सिफ़ारिश भी की गई है।
सवाल: आखिर क्यों दबाया जा रहा है मामला?
जब पूरे प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण के लिए व्यापक अभियान चल रहा है, तब यह मामला कई बड़े सवाल खड़े करता है:
- जब जांच रिपोर्ट में अवैध कटाई की पुष्टि हो चुकी है, तो फिर कार्रवाई में देरी क्यों हो रही है?
- क्या गोदावरी इस्पात का राजनीतिक या प्रशासनिक प्रभाव इतना मज़बूत है कि पर्यावरण से जुड़े इतने बड़े अपराध को दबाया जा रहा है?
- ‘एक पेड़ मां के नाम’ जैसे अभियानों का क्या महत्व रह जाता है, जब एक ही जगह हज़ारों पेड़ काट दिए जाते हैं और कोई कार्रवाई नहीं होती?
प्रदेश में बड़े पैमाने पर अवैध खनन और वन कटाई के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं। लेकिन यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि यह सीधे तौर पर सरकारी रिपोर्टों से जुड़ा है।
जनता चाहती है जवाब
कांकेर और आसपास के लोग जानना चाहते हैं कि पर्यावरण संरक्षण को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता कितनी मज़बूत है। इस मामले पर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री कार्यालय तक भी शिकायतें भेजी गई हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या सरकार अपने अभियानों के प्रति ईमानदार रहते हुए, इस पर्यावरण अपराध के दोषी कंपनी पर सख्त कार्रवाई करती है, या फिर चांदी की खनक के सामने पर्यावरण को नज़रअंदाज़ किया जाएगा।




