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आईपीएस मयंक गुर्जर: अभावों के बीच संघर्ष और सफलता की एक मिसाल

सफलता की कहानियाँ बहुत होती हैं, लेकिन कुछ कहानियाँ दिल को छू लेती हैं क्योंकि वे बेहद कठिन परिस्थितियों से निकलकर लिखी जाती हैं। छत्तीसगढ़ कैडर के 2020 बैच के आईपीएस (IPS) अधिकारी मयंक गुर्जर की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। इंदौर की एक छोटी सी बस्ती से शुरू हुआ उनका सफर आज देश की सेवा के उच्च शिखर तक पहुँच चुका है।

बचपन और पारिवारिक संघर्ष:- मयंक गुर्जर का जन्म मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित मुसाखेड़ी क्षेत्र की एक बस्ती में हुआ था। उनके पिता एक निजी कंपनी में अकाउंटेंट थे और परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत सामान्य थी। मयंक की शुरुआती पढ़ाई चुनौतीपूर्ण रही; यहाँ तक कि कक्षा 6 में उन्हें विज्ञान विषय में सप्लीमेंट्री का सामना करना पड़ा। लेकिन इस छोटी सी असफलता ने उन्हें भविष्य के लिए और अधिक मजबूत बना दिया।
पिता का निधन और कठिन समय :-जब मयंक 11वीं कक्षा में थे, तब उनके पिता गंभीर रूप से बीमार हो गए। मयंक के लिए सबसे दुखद समय तब आया जब उनकी 12वीं की परीक्षाओं के दौरान ही उनके पिता का निधन हो गया। पिता का सपना था कि मयंक खूब पढ़ें और आगे बढ़ें। पिता के जाने के बाद घर की जिम्मेदारी और आर्थिक तंगी बढ़ गई, लेकिन मयंक की माता जी ने साहस दिखाया और उनकी पढ़ाई रुकने नहीं दी।
आईआईटी बॉम्बे से यूपीएससी तक का सफर मयंक ने अपनी मेहनत के दम पर देश के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी बॉम्बे (IIT Bombay) में दाखिला लिया और केमिकल इंजीनियरिंग की डिग्री पूरी की। अपनी पढ़ाई का खर्च निकालने के लिए उन्होंने ट्यूशन पढ़ाए और स्कॉलरशिप का सहारा लिया। इसके बाद उन्होंने दिल्ली जाकर यूपीएससी (UPSC) की तैयारी शुरू की। दिल्ली में संघर्ष के दिनों में ऐसी भी स्थितियाँ आईं जब उनके पास रहने के लिए सही जगह नहीं थी, और उन्होंने कोचिंग की बेंचों पर सोकर रातें बिताईं।


पहले ही प्रयास में हासिल की सफलता कठोर परिश्रम और दृढ़ निश्चय का परिणाम यह रहा कि मयंक ने अपने पहले ही प्रयास में यूपीएससी की परीक्षा उत्तीर्ण की। उन्होंने देशभर में 455वीं रैंक हासिल की और भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के लिए चुने गए। उनकी यह सफलता उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणा है जो संसाधनों की कमी को अपनी तरक्की में बाधा मानते हैं।
एक कर्तव्यनिष्ठ पुलिस अधिकारी:- वर्तमान में मयंक गुर्जर छत्तीसगढ़ के रायपुर में डीसीपी (DCP North) के पद पर तैनात हैं। उन्होंने बस्तर जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में नक्सल विरोधी अभियानों में अपनी बहादुरी का परिचय दिया है। उनकी उत्कृष्ट कार्यप्रणाली के लिए उन्हें ‘फिक्की स्मार्ट पुलिसिंग अवार्ड’ और ‘केंद्रीय गृह मंत्री दक्षता पदक’ से भी सम्मानित किया जा चुका है।

आईपीएस मयंक गुर्जर का जीवन हमें सिखाता है कि परिस्थितियाँ चाहे कितनी भी विपरीत क्यों न हों, यदि इंसान के मन में अटूट विश्वास और कड़ी मेहनत करने का जज्बा हो, तो वह किसी भी मुकाम को हासिल कर सकता है। आज वे अपनी ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा से समाज में सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं।

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