अपराधन्यायधानीपुलिस

बिलासपुर: पार्टनरशिप और मुनाफे का झांसा देकर 17 लाख की ठगी, तोरवा पुलिस ने आरोपी को दबोचा

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के न्यायधानी में धोखाधड़ी और जालसाजी के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। ताजा मामला तोरवा थाना क्षेत्र का है, जहां कोल माइंस में निवेश और पार्टनरशिप के नाम पर एक महिला से लाखों रुपये की ठगी की गई। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है।

घटना का क्रम और विश्वासघात की कहानी
यह पूरा मामला भरोसे और लालच के इर्द-गिर्द बुना गया है। प्रार्थिया वैशाली सिरामे, जो तोरवा के मधुसूदन हाईट्स में रहती हैं, उनके पड़ोस में ही रहने वाले आरोपी सचिन कुमार मानिकपुरी (28 वर्ष) ने इस ठगी की साजिश रची।
आरोपी कोरबा की कोल माइंस में कार्यरत था, जिसका फायदा उठाकर उसने प्रार्थिया को झांसा दिया कि यदि वे मिलकर हाईवा (भारी वाहन) खरीदते हैं और उसे माइंस में लगवाते हैं, तो उन्हें मोटा मुनाफा होगा। पड़ोस में रहने और माइंस की जानकारी होने के कारण प्रार्थिया आरोपी की बातों में आ गई। निवेश के नाम पर आरोपी ने अलग-अलग किस्तों में कुल 17 लाख रुपये हड़प लिए।
अपराध का तरीका: फर्जी दस्तावेजों का सहारा
इस धोखाधड़ी में सबसे गंभीर पहलू ‘फोर्जेड डीड’ (फर्जी विक्रय पत्र) का निर्माण है। जब प्रार्थिया ने निवेश के प्रमाण मांगे, तो आरोपी सचिन ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर उन्हें सौंप दिए ताकि विश्वास बना रहे। भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) (धोखाधड़ी और बेईमानी से संपत्ति हस्तांतरित करना) और 336(3) (जालसाजी) के तहत यह एक गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई और विवेचना
मामले की गंभीरता को देखते हुए बिलासपुर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने जांच की जिम्मेदारी नगर पुलिस अधीक्षक (CSP) श्री गगन कुमार (IPS) को सौंपी। पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हो गया कि न तो कोई हाईवा खरीदा गया और न ही निवेश किया गया; बल्कि पूरे 17 लाख रुपये निजी स्वार्थ के लिए उपयोग किए गए।
सीएसपी के निर्देश पर तोरवा थाना पुलिस ने घेराबंदी की और आरोपी के फरार होने से पहले ही उसे गिरफ्तार कर लिया। आरोपी सचिन कुमार मानिकपुरी अब पुलिस की गिरफ्त में है और उसके विरुद्ध साक्ष्य एकत्रित किए जा रहे हैं।
साइबर और वित्तीय अपराधों के प्रति सतर्कता :-
जैसा कि हम देखते हैं कि हाल के दिनों में साइबर और वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में वृद्धि हुई है (विशेषकर छत्तीसगढ़ के औद्योगिक क्षेत्रों में), यह मामला नागरिकों के लिए एक बड़ी सीख है।

  • पड़ोसी या परिचित पर अंधविश्वास: कई बार ठगी करने वाला व्यक्ति परिचित ही होता है, जो ‘सोशल इंजीनियरिंग’ के जरिए आपका भरोसा जीतता है।
  • दस्तावेजों का सत्यापन: किसी भी बड़ी डील या पार्टनरशिप से पहले दस्तावेजों को संबंधित विभाग (जैसे RTO या कोल माइंस ऑफिस) से सत्यापित कराना अनिवार्य है।
  • कानूनी जागरूकता: BNS की नई धाराओं के तहत अब पुलिस को ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई और कड़े प्रावधानों के प्रयोग की शक्ति मिली है।

    बिलासपुर पुलिस की यह कार्यवाही अपराधियों के लिए एक कड़ा संदेश है। हालांकि पुलिस ने आरोपी को पकड़ लिया है, लेकिन सार्वजनिक जागरूकता ही ऐसे अपराधों को रोकने का एकमात्र प्रभावी तरीका है। यदि कोई आपको कम समय में अत्यधिक मुनाफे का लालच देता है, तो वह ठगी का शिकार बनाने की पहली सीढ़ी हो सकती है।
Join Dainik Bodh Whatsapp Community

Related Articles

Back to top button