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भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही जंग में आज छत्तीसगढ़ में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) और आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) की संयुक्त टीमों ने प्रदेश के करीब 20 से अधिक ठिकानों पर एक साथ ताबड़तोड़ दबिश दी। यह ‘महाछापा’ प्रदेश के दो सबसे बड़े वित्तीय घोटालों—आबकारी घोटाला और डीएमएफ (DMF) घोटाला—से जुड़े बड़े अधिकारियों और कारोबारियों पर शिकंजा कसने के लिए मारा गया है।।                                                                🚨 कौन-कौन हैं निशाने पर? :-एजेंसियों की रडार पर इस बार सीधे दो हाई-प्रोफाइल शख्सियतें हैं, जिनके ठिकानों पर दस्तावेजों की गहन पड़ताल की जा रही है:

  • निरंजन दास (पूर्व आबकारी अधिकारी): आबकारी विभाग में कथित अनियमितताओं और हजारों करोड़ के घोटाले से जुड़े इस मामले में पूर्व अधिकारी निरंजन दास के रायपुर और उनके रिश्तेदारों के कई ठिकानों पर रेड पड़ी है। सूत्रों के मुताबिक, उनकी चल-अचल संपत्ति और बेनामी लेन-देन से जुड़े अहम दस्तावेज खंगाले जा रहे हैं।
  • हरपाल अरोरा (कारोबारी): डीएमएफ (डिस्ट्रिक्ट मिनरल फंड) घोटाले के मुख्य आरोपी माने जाने वाले कारोबारी हरपाल अरोरा के ठिकानों पर भी EOW की टीम ने घेराबंदी की है। यह कार्रवाई खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास फंड में फर्जी बिलिंग और हेराफेरी से संबंधित है।
    🗺️ कहां-कहां दी गई दबिश?
    ACB और EOW की टीमें सुबह से ही कार्रवाई में जुटी हैं। रेड की कार्रवाई सिर्फ राजधानी रायपुर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने प्रदेश के कई महत्वपूर्ण जिलों को कवर किया है। इन ठिकानों में शामिल हैं:
  • रायपुर (मुख्य केंद्र)
  • जगदलपुर
  • कोंडागांव
  • अंबिकापुर
  • बिलासपुर
  • अन्य कारोबारी ठिकाने
    ⏳ बड़े खुलासों की उम्मीद
    जांच एजेंसी के सूत्रों के अनुसार, यह रेड सिर्फ एक शुरुआत है। इन ठिकानों से बड़ी मात्रा में नकदी, जेवरात, और घोटाले से संबंधित डिजिटल व हार्ड कॉपी साक्ष्य बरामद होने की प्रबल संभावना है, जो दोनों घोटालों की परतें खोलने में निर्णायक साबित होंगे।
    कार्यवाही फिलहाल जारी है, और माना जा रहा है कि इस ऑपरेशन के बाद प्रदेश में कई नए राजनीतिक और प्रशासनिक चेहरे बेनकाब हो सकते हैं।
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